रक्षा मंत्रालय ने ‘स्पर्श’ में गए पेंशनभोगियों के भुगतान में तीन महीने का विस्तार किया

रक्षा मंत्रालय ने ‘स्पर्श’ में गए पेंशनभोगियों के भुगतान में तीन महीने का विस्तार किया

रक्षा मंत्रालय ने ‘स्पर्श’ में गए पेंशनभोगियों के भुगतान में तीन महीने का विस्तार किया
Modified Date: November 30, 2022 / 10:24 pm IST
Published Date: November 30, 2022 10:24 pm IST

नयी दिल्ली, 30 नवंबर (भाषा) रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि उसने उन पेंशनभोगियों के लिए पेंशन भुगतान के विस्तार को तीन महीने के लिए मंजूरी दे दी है, जिन्होंने उसके ‘स्पर्श प्लेटफॉर्म’ को चुना है और जिनकी पहचान नवंबर में होनी थी।

‘द सिस्टम फॉर पेंशन एडमिनिस्ट्रेशन’ (रक्षा) या ‘स्पर्श’ पेंशन दावों को संसाधित करने और बिना किसी बाहरी मध्यस्थ के, सीधे रक्षा पेंशनभोगियों के बैंक खातों में पेंशन जमा करने के लिए वेब आधारित एक प्रणाली है।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “रक्षा मंत्रालय ने बैंकों के उन पेंशनभोगियों के वास्ते तीन महीने के लिए पेंशन भुगतान के विस्तार को मंजूरी दे दी है, जो ‘स्पर्श’ में चले गए … और जिनकी पहचान नवंबर 2022 में होनी थी।”

साथ ही बयान में कहा गया है, “यह दोहराया जाता है कि मासिक पेंशन निरंतर और समय पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक पहचान/जीवन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया एक वैधानिक आवश्यकता है। इसलिए, सभी रक्षा पेंशनभोगियों से अनुरोध किया जाता है कि वे अपनी पेंशन पात्रता की सुचारू प्रक्रिया और पेंशन प्राप्त करने के लिए वार्षिक पहचान/जीवन प्रमाणीकरण फरवरी 2023 तक पूरा करें।”

एक अन्य बयान में, मंत्रालय ने कहा कि वार्षिक संयुक्त मानवीय सहायता और आपदा राहत अभ्यास, ‘समन्वय 2022’ का समापन वायु सेना स्टेशन, आगरा में होगा, जहां यह 28 नवंबर से शुरू हुआ था।

मंत्रालय ने कहा कि इसके अलावा, भारतीय तट रक्षक (आईसीजी) ने बुधवार को चेन्नई में 24वीं राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिक योजना और तैयारी बैठक आयोजित की।

इसमें विभिन्न मंत्रालयों, केंद्र और राज्य सरकार के विभागों और एजेंसियों, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बंदरगाहों और तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों सहित लगभग 100 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

मंत्रालय ने एक अन्य बयान में कहा कि भारतीय जल क्षेत्र में किसी भी तेल और रासायनिक रिसाव की आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए सामूहिक तैयारी सुनिश्चित करने के सामान्य उद्देश्य के साथ राष्ट्रीय क्षमताओं की समीक्षा की गई।

भाषा जितेंद्र मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में