दिल्ली का लक्ष्य 2035 तक प्रतिदिन 25,000 टन से अधिक कचरा प्रसंस्करण की क्षमता हासिल करना है

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दिल्ली का लक्ष्य 2035 तक प्रतिदिन 25,000 टन से अधिक कचरा प्रसंस्करण की क्षमता हासिल करना है

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  • Publish Date - August 20, 2026 / 08:43 PM IST,
    Updated On - August 20, 2026 / 08:43 PM IST

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) वर्ष 2035 तक शहर में रोजाना 25,000 टन से अधिक कचरे के प्रसंस्करण की क्षमता विकसित करने की योजना बना रहा है। इसके तहत कचरे से बिजली बनाने वाले मौजूदा संयंत्रों का विस्तार किया जाएगा और नए संयंत्र लगाए जाएंगे। ‘दिल्ली मास्टर प्लान (एमपीडी)-2047’ में इसका जिक्र किया गया है।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा तैयार और बृहस्पतिवार को अधिसूचित मास्टर प्लान (एमपीडी) में अनुमान जताया गया है कि दिल्ली में नगरपालिका के ठोस कचरे की मात्रा वर्ष 2026 के 13,500 टन प्रतिदिन (टीपीडी) से बढ़कर 2047 तक 25,764 टीपीडी हो जाएगी।

मास्टर प्लान के अनुसार, यह वृद्धि आबादी बढ़ने और प्रति व्यक्ति कचरा के आंकड़े में वृद्धि के कारण होगी। प्रति व्यक्ति प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे की मात्रा के मौजूदा 0.597 किलोग्राम से बढ़कर 2047 तक 0.783 किलोग्राम होने का अनुमान है।

इसके मुकाबले, एमपीडी 2047 में एमसीडी की कचरा प्रसंस्करण क्षमता 2035 तक बढ़ाकर 25,392 टीपीडी करने और 2047 तक इसी स्तर पर बनाए रखने का अनुमान है। इसके परिणामस्वरूप उस वर्ष अनुमानित कचरा उत्पादन की तुलना में 372 टीपीडी की कमी रहेगी।

दस्तावेज के अनुसार, फिलहाल प्रतिदिन करीब 7,642 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाता है, जबकि प्रतिदिन करीब 5,858 टन कचरा लैंडफिल पर भेजा जाता है।

एमपीडी 2047 के अनुसार, एमसीडी की मौजूदा कचरा प्रसंस्करण सुविधाओं में ओखला में 1,950 टीपीडी क्षमता वाला कचरा-से-ऊर्जा संयंत्र, नरेला-बवाना में 2,400 टीपीडी क्षमता वाली एकीकृत कचरा प्रसंस्करण सुविधा, गाजीपुर में 1,300 टीपीडी क्षमता वाला संयंत्र और तेहखंड में 2,000 टीपीडी क्षमता वाला संयंत्र शामिल हैं।

भाषा

राखी संतोष

संतोष