दिल्ली की अदालत ने मेट्रो ट्रेन में यौन उत्पीड़न के मामले में व्यक्ति की दोषसिद्धि को बरकरार रखा

दिल्ली की अदालत ने मेट्रो ट्रेन में यौन उत्पीड़न के मामले में व्यक्ति की दोषसिद्धि को बरकरार रखा

दिल्ली की अदालत ने मेट्रो ट्रेन में यौन उत्पीड़न के मामले में व्यक्ति की दोषसिद्धि को बरकरार रखा
Modified Date: March 10, 2026 / 06:57 pm IST
Published Date: March 10, 2026 6:57 pm IST

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने मेट्रो ट्रेन के अंदर महिला के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में एक व्यक्ति की दोषसिद्धि को बरकरार रखा, और सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपाय करने पर बल दिया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी ने मोहम्मद ताहिर द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (किसी महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और धारा 354ए (यौन उत्पीड़न) के तहत अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दी थी।

अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) छाया त्यागी द्वारा 24 मई, 2025 को सुनाए गए दोषसिद्धि के निर्णय और छह अक्टूबर, 2025 को सुनाई गई सजा के आदेश को बरकरार रखा।

अदालत ने नौ मार्च के अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष ने निचली अदालत के समक्ष उचित संदेह से परे मामले को सफलतापूर्वक साबित किया और आईपीसी की धारा 354 के तहत दंडनीय अपराध सिद्ध हुआ।

यह घटना 27 मार्च, 2021 की शाम को दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन पर साकेत और हौज खास स्टेशनों के बीच एक ट्रेन में घटी, जब ताहिर ने शिकायतकर्ता के बगल में खड़े होकर अश्लील हरकत की और विरोध के बावजूद उसके कंधे पर हाथ फेरा।

भाषा शफीक दिलीप

दिलीप


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