नयी नीति के तहत ड्रोन क्लस्टर, प्रौद्योगिकी आधारित शासन व्यवस्था बनाने की दिल्ली सरकार की योजना

नयी नीति के तहत ड्रोन क्लस्टर, प्रौद्योगिकी आधारित शासन व्यवस्था बनाने की दिल्ली सरकार की योजना

नयी नीति के तहत ड्रोन क्लस्टर, प्रौद्योगिकी आधारित शासन व्यवस्था बनाने की दिल्ली सरकार की योजना
Modified Date: April 4, 2026 / 07:41 pm IST
Published Date: April 4, 2026 7:41 pm IST

(सिद्धांत मिश्रा)

नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) दिल्ली सरकार की प्रस्तावित ड्रोन नीति में ड्रोन अनुसंधान ‘क्लस्टर’ बनाने, उड़ान परीक्षण के लिए समर्पित सुविधाएं स्थापित करने, यातायात प्रबंधन में ड्रोन के इस्तेमाल को सक्षम बनाने और ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देने के लिए सब्सिडी उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों के अनुसार, हाल में हुई एक बैठक में नीति की रूपरेखा पर चर्चा की गई जिसमें इस क्षेत्र की एक अग्रणी गैर-सरकारी संस्था ‘ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (डीएफआई) को शामिल करने की योजना को मंजूरी दी गई।

सरकार ने इस साल की शुरुआत में दिल्ली ड्रोन नीति की व्यवहार्यता की जांच के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी।

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री पंकज सिंह ने कहा, ‘‘ड्रोन का सुरक्षित और विनियमित संचालन सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक ड्रोन नीति की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही, सरकार प्रभावी शासन व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए एक ‘आईटी डैशबोर्ड’ और एक डिजिटल निगरानी प्रणाली पर काम कर रही है।’’

अधिकारियों के अनुसार, नीति के प्रमुख उद्देश्यों में दुरुपयोग रोकने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल को विनियमित करना, निगरानी के लिए सरकारी एजेंसियों को ड्रोन इस्तेमाल करने में सक्षम बनाना और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के ‘डिजिटल स्काई’ मंच के साथ एकीकरण को मजबूत करना शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘‘नीति में रियल एस्टेट परियोजनाओं, दूरसंचार और मीडिया में ड्रोन के क्षेत्रवार इस्तेमाल की भी योजना है।’’

योजना के अनुसार, सरकार विद्यालयों में ड्रोन जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने, उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने, ‘रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन’ (आरपीटीओ) स्थापित करने और प्रशिक्षण परियोजनाएं शुरू करने जैसी क्षमता निर्माण पहलों पर विचार कर रही है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘नीति के तहत ड्रोन के लिए सहायक तंत्र, अनुसंधान के लिए ड्रोन ‘क्लस्टर, उड़ान परीक्षण सुविधाएं एवं सब्सिडी तथा राज्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की प्रतिपूर्ति जैसी व्यवस्थाएं शामिल की जा सकती हैं।’’

इस रूपरेखा में ड्रोन अनुसंधान और अन्य विकास गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किए जाने की संभावना है।

भाषा सिम्मी नेत्रपाल

नेत्रपाल


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