दिल्ली: अदालत ने जिमखाना क्लब खाली करने के नोटिस के खिलाफ दायर याचिकाओं पर केंद्र से मांगा जवाब

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दिल्ली: अदालत ने जिमखाना क्लब खाली करने के नोटिस के खिलाफ दायर याचिकाओं पर केंद्र से मांगा जवाब

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  • Publish Date - July 6, 2026 / 12:09 PM IST,
    Updated On - July 6, 2026 / 12:09 PM IST

नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों की उन याचिकाओं पर सोमवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा, जिनमें सफदरजंग रोड स्थित क्लब के 27.3 एकड़ परिसर को खाली कराने के लिए जारी नोटिस को चुनौती दी गई है।

न्यायाधीश अवनीश झिंगन ने कारण बताओ नोटिस के अमल पर रोक लगाने के अनुरोध वाले आवेदनों पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि संपदा अधिकारी के समक्ष सात जुलाई को होने वाली सुनवाई को अदालत में अगली तारीख 28 जुलाई के बाद के किसी दिन तक स्थगित कराया जाए।

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि केंद्र इन आवेदनों पर अपना जवाब दाखिल करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि संपदा अधिकारी के समक्ष इस मामले की सुनवाई सात जुलाई को निर्धारित है।

मेहता ने कहा, ‘‘वे वहां सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध कर सकते हैं।’’

न्यायाधीश झिंगन ने न्यायिक अधिकारी से कहा, ‘‘मिस्टर मेहता, हम इसे पहले से तय तारीख (मुख्य मामले में) के लिए रख रहे हैं। बस यह देख लें कि इसे (संपदा अधिकारी की सुनवाई को) उस तारीख के बाद के लिए स्थगित कर दिया जाए।’’

विजय खुराना और ‘दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन’ की ये याचिकाएं उनके लंबित वाद का हिस्सा हैं। यह वाद भूमि एवं विकास कार्यालय के 22 मई के उस आदेश के बाद दायर किया गया था, जिसमें स्थायी पट्टा रद्द करते हुए औपनिवेशिक काल के इस क्लब को रक्षा ढांचों को मजबूत और अधिक सुरक्षित बनाने का हवाला देकर पांच जून तक जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया था।

केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय ने 29 जून को क्लब को एक कारण बताओ नोटिस जारी कर यह बताने के लिए कहा कि सरकारी स्थान (अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत उसके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए।

संपदा अधिकारी बिपिन कुमार सिंह द्वारा जारी किए गए इस नोटिस में क्लब और परिसर पर कब्जा रखने वाले सभी संबंधित पक्षों को सात जुलाई तक अपना जवाब प्रस्तुत करने और उसी दिन अपराह्न ढाई बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था।

यह कदम उस घटनाक्रम के एक महीने से अधिक समय बाद उठाया गया है, जब केंद्र सरकार ने 26 मई को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया था कि वह रक्षा अवसंरचना को मजबूत और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक 27.3 एकड़ परिसर पर पांच जून तक जबरन कब्जा नहीं लेगा।

मेहता ने तब कहा था कि केंद्र सरकार कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही क्लब की जमीन को अपने कब्जे में लेगी।

भाषा खारी वैभव

वैभव