नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायलय ने मानव तस्करी के मामले में एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। आरोपी पर पीड़िता से जबरन शादी करने का आरोप है।
अदालत ने अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज करते हुए टिप्पणी की कि उस पर लगे आरोप गंभीर हैं और इस चरण पर यह नहीं माना जा सकता कि पीड़िता के साथ उसकी शादी वैध तरीके से हुई थी।
न्यायमूर्ति मनोज जैन ने 11 अगस्त को दिये आदेश में कहा, ‘‘आरोपों की प्रकृति और अभियोजन पक्ष द्वारा मानव तस्करी को लेकर रखे गए तथ्यों पर संज्ञान लेने के बाद प्रतीत होता है कि आवेदक को हिरासत में लेकर पूछताछ करना आवश्यक होगा।’’
अदालत ने कहा कि आरोप ‘बेहद गंभीर’ और ‘चिंताजनक’ हैं और आवेदन में कोई दम नहीं है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दो लोगों ने 17 साल की पीड़िता का यौन उत्पीड़न किया और उसे 30,000 रुपये में आरोपी सुखराम को ‘बेच’ दिया।
पीड़िता ने आरोप लगाया था कि दो लोगों ने उसका यौन उत्पीड़न किया और उत्तर प्रदेश ले जाकर जबरन उम्रदराज सुखराम से उसकी शादी करा दी।
पीड़िता के रिश्तेदार की तहरीर पर पुलिस ने अपहरण, मानव तस्करी और यौन उत्पीड़न की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि दो आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वे हिरासत में हैं, जबकि एक अन्य आरोपी को जमानत दे दी गई क्योंकि उस पर यौन उत्पीड़न का कोई आरोप नहीं था।
उन्होंने कहा कि आरोपी, जिसमें याचिकाकर्ता भी शामिल है, ने पीड़िता की कम उम्र और उसकी मानसिक स्थिति का अनुचित लाभ उठाया।
भाषा धीरज शोभना
शोभना