नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) दिल्ली सरकार आगामी प्रदूषण के मौसम से निपटने के लिए तैयारियों में जुट गई है। इसके तहत दिल्ली में पंजीकृत लगभग 78,000 पुराने भारी वाहनों की पहचान कर उन्हें स्वेच्छा से अधिक स्वच्छ बीएस-छह मॉडलों में बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिला-स्तरीय कार्यबल का गठन किया जा रहा है, और निर्माण अपशिष्ट संग्रहण स्थलों का विस्तार किया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने जुलाई में शुरू किए गए अपने प्रदूषण विरोधी पोर्टल के माध्यम से धूल की निगरानी भी तेज कर दी है। इसके तहत एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से लैस कैमरों ने लगभग 2,000 ऐसे स्थानों की पहचान की है, जहां प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उपायुक्त, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारी जिला स्तर पर यातायात जाम और प्रदूषण के प्रमुख केंद्रों की पहचान करेंगे तथा स्थानीय स्तर पर ही उनका समाधान खोजेंगे। जिलों को इस महीने के अंत तक अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।
सरकार इस वाहन परिवर्तन अभियान को केंद्र सरकार की 9,585 करोड़ रुपये की ‘परिवर्तन’ योजना के हिस्से के रूप में भी आगे बढ़ा रही है। इस योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली और हरियाणा, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में कम प्रदूषण फैलाने वाले वाणिज्यिक वाहनों के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ावा देना है।
अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में पंजीकृत बीएस-तीन और बीएस-चार श्रेणी के लगभग 78,000 भारी वाहनों की पहचान की गई है। फिलहाल यह प्रक्रिया पूरी तरह से स्वैच्छिक है और सरकार का जोर वाहन मालिकों को जागरूक व प्रोत्साहित करने पर है।
योजना के तहत केंद्र सरकार से 5,041 करोड़ रुपये की सहायता दी जा रही है। इसके माध्यम से नए बीएस-छह मानकों वाले डीजल या सीएनजी वाहन, अथवा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले पात्र लाभार्थियों को कई वित्तीय लाभ मिल सकेंगे। इनमें मोटर वाहन टैक्स पर पूरी छूट, पंजीकरण शुल्क की पूरी माफी, वाहन लोन पर पांच प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी और योजना में शामिल मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) की ओर से आठ प्रतिशत तक का डिस्काउंट शामिल है।
अधिकारी ने बताया कि प्रशासन ने दिल्ली में निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे को इकट्ठा करने वाले केंद्रों की संख्या 106 से बढ़ाकर 125 कर दी है।
अपनी हरित पहलों के हिस्से के रूप में, सरकार ने 70 लाख पौधे लगाने के लक्ष्य के मुकाबले अब तक लगभग 60 लाख पौधे लगा दिए हैं। अधिकारी ने बताया, ‘‘इस पौधारोपण अभियान के माध्यम से कुल पौधों की संख्या अब तक 60 लाख को पार कर गई है।’’
भाषा सुमित दिलीप
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