अनुपालन समीक्षा के बाद ही दिल्ली रिज में और पेड़ काटने से जुड़ी डीडीए की याचिका पर विचार: न्यायालय

अनुपालन समीक्षा के बाद ही दिल्ली रिज में और पेड़ काटने से जुड़ी डीडीए की याचिका पर विचार: न्यायालय

अनुपालन समीक्षा के बाद ही दिल्ली रिज में और पेड़ काटने से जुड़ी डीडीए की याचिका पर विचार: न्यायालय
Modified Date: January 5, 2026 / 09:58 pm IST
Published Date: January 5, 2026 9:58 pm IST

नयी दिल्ली, पांच जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया कि वह दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को दिल्ली रिज क्षेत्र में अतिरिक्त पेड़ काटने की अनुमति तभी देगा जब वह पूरी तरह से संतुष्ट हो जाएगा कि वनीकरण और पारिस्थितिकी बहाली पर उसके पूर्व निर्देशों का अनुपालन किया गया है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ डीडीए द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल आयुर्विज्ञान संस्थान (सीएपीएफआईएमएस) को जोड़ने वाली सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए 473 पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी गई थी।

सीएपीएफआईएमएस दिल्ली के मैदानगढ़ी में स्थित एक प्रमुख स्वास्थ्य सेवा और शैक्षिक परियोजना है, जो बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ आदि जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के कर्मियों और उनके परिवारों को विशेष चिकित्सा सेवाएं, नर्सिंग शिक्षा और पैरामेडिकल प्रशिक्षण प्रदान करती है।

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डीडीए ने प्रस्तावित निर्माण के लिए 2,519 वृक्षों और झाड़ियों वाले पौधों के स्थानांतरण और 2.97 हेक्टेयर वन भूमि के भूउपयोग परिवर्तन के लिए भी अनुमोदन मांगा है।

सुनवाई के दौरान, प्रधान न्यायाधीश ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि वृक्षों की कटाई के लिए आगे कोई अनुमति तब तक नहीं दी जाएगी जब तक कि पीठ 28 मई, 2025 को जारी किए गए उसके पिछले निर्देशों के अनुपालन से संतुष्ट नहीं हो जाती।

इससे पहले, पीठ ने यह आदेश दिया था कि वनीकरण, सड़क निर्माण, वृक्ष काटने या संभावित पारिस्थितिकी प्रभाव वाली किसी भी गतिविधि से संबंधित प्रत्येक अधिसूचना या आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कार्यवाही लंबित होने का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए।

इसने क्षतिपूर्ति पौधरोपण के संबंध में विस्तृत निर्देश भी जारी किए थे।

प्रधान न्यायाधीश ने पहले की गयी वृक्षारोपण संबंधी प्रतिबद्धताओं का जिक्र करते हुए कहा, “जब तक हम स्वयं अनुपालन से संतुष्ट नहीं हो जाते, तब तक हम कुछ भी होने नहीं देंगे। अनुपालन कहां है? 1.65 लाख पेड़ और 18 स्थलों का क्या हुआ?”

डीडीए की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह उपस्थित हुए।

सिंह ने अदालत को बताया कि 185 एकड़ भूमि पौधरोपण के लिए चिन्हित की गई है और उसका कब्जा सौंप दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि डीडीए चिन्हित भूमि के चारों ओर चारदीवारी बनाने की प्रक्रिया में है और उसे उम्मीद है कि यह काम 28 फरवरी तक पूरा हो जाएगा।

एक व्यापक स्थिति रिपोर्ट दर्ज करने के लिए समय मांगते हुए, सॉलिसिटर जनरल ने अनुपालन की प्रगति के संबंध में विस्तृत निर्देश प्राप्त करने के लिए शुक्रवार तक के लिए स्थगन का अनुरोध किया।

प्रधान न्यायाधीश ने हालांकि, संपूर्ण और स्थलवार रिपोर्ट की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा, “हमें अब तक सभी 18 स्थलों पर उठाए गए कदमों और आगे की योजनाओं के बारे में एक संपूर्ण रिपोर्ट चाहिए?”

इस मामले में अगली सुनवाई 19 जनवरी को निर्धारित की गयी है।

भाषा प्रशांत वैभव

वैभव


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