दिल्ली दंगे मामला: अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन व दो अन्य की जमानत याचिका खारिज की

दिल्ली दंगे मामला: अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन व दो अन्य की जमानत याचिका खारिज की

दिल्ली दंगे मामला: अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन व दो अन्य की जमानत याचिका खारिज की
Modified Date: January 29, 2026 / 09:31 pm IST
Published Date: January 29, 2026 9:31 pm IST

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय द्वारा इस महीने की शुरुआत में 2020 के दिल्ली दंगों के बड़े षड्यंत्र मामले में पांच आरोपियों को जमानत दिए जाने के बावजूद, राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने इस मामले में लगभग समान आरोपों का सामना कर रहे अन्य तीन सह-आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी बृहस्पतिवार को अतहर खान, सलीम मलिक और आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे और उन्होंने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ मामला बनता है।

इन तीनों आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत 2020 के दंगों में कथित संलिप्तता के आरोप लगाए गए हैं।

तीनों ने पांच जनवरी को उच्चतम न्यायालय द्वारा इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद जमानत याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने तर्क दिया था कि उन पर भी समान आरोप हैं और समानता की मांग की थी।

अदालत ने ‘आप’ के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, “सह-आरोपियों के संबंध में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद, जब इस अदालत ने एक बार यह राय बना ली है कि आवेदक के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है, तो अब पूर्व आदेश की समीक्षा करके कोई भिन्न राय नहीं बनाई जा सकती है।’

अदालत ने गौर किया कि तीनों आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाए गए हैं और तीन अलग-अलग आदेशों में इसी तरह की दलील दी गई है कि आरोपियों के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद उनकी पिछली जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं।

यूएपीए की धारा 43डी(5) के अनुसार, यदि अदालत केस डायरी या दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 के तहत दाखिल रिपोर्ट को देखकर यह राय बनाती है कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप पहली नजर में सही प्रतीत होते हैं, तो ऐसे आरोपी को न तो जमानत पर और न ही निजी मुचलके पर रिहा किया जाएगा।

अपने आरोपपत्र में, दिल्ली पुलिस ने हुसैन और कार्यकर्ताओं खालिद सैफी और उमर खालिद के बीच संबंधों का आरोप लगाया था। वे दिल्ली में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने वाले लोगों के एक बड़े समूह का हिस्सा थे।

पुलिस ने ताहिर हुसैन के घर से कांच की बोतलों से भरे बक्से भी बरामद किए हैं, जिनमें कुछ तरल पदार्थ भरा हुआ था और उनके मुंह पर कपड़े के टुकड़े ठूंसे हुए थे, जिनका इस्तेमाल ‘मोलोटोव कॉकटेल’ (पेट्रोल बम) के रूप में किया जाना था। इसके अलावा, पुलिस को बड़ी संख्या में ईंटें और पत्थर के टुकड़े और तीन गुलेल भी बरामद हुए।

कॉल सेंटर के पूर्व कर्मचारी अतहर पर उत्तरपूर्वी दिल्ली के चांद बाग में हुए विरोध प्रदर्शन के मुख्य आयोजकों में से एक होने और वहां कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया गया है।

दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ के अनुसार, अतहर ने कथित तौर पर गुप्त बैठकों में भाग लिया, जिसमें उसने कहा कि ‘दिल्ली को जलाने का समय आ गया है’ और सीसीटीवी कैमरों को नष्ट करने को लेकर समन्वय किया।

सलीम उन 11 कथित आयोजकों और वक्ताओं में भी शामिल था जिन्होंने सीएए/एनआरसी विरोधी बैठक का आयोजन किया था।

कथित आयोजक मोहम्मद सलीम खान, सलीम मलिक, मोहम्मद जलालुद्दीन उर्फ​गुड्डू भाई, शाहनवाज, फुरकान, मोहम्मद अयूब, मोहम्मद यूनुस, तबस्सुम, मोहम्मद अयाज और उसके भाई खालिद थे।

उच्चतम न्यायालय ने पांच जनवरी को, फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में पांच आरोपियों – गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद – को जमानत दे दी।

शीर्ष अदालत ने हालांकि कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि इस मामले में सभी आरोपी एक समान स्थिति में नहीं हैं।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के दो पूर्व छात्रों खालिद और इमाम की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि यूएपीए के तहत उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

इस मामले में नामजद 20 आरोपियों में से दो अब भी फरार हैं, और शेष 18 ने अतीत में जमानत के लिए आवेदन किया था।

इस मामले में 18 आरोपियों में से सात अब भी जेल में हैं, जिनमें खालिद, इमाम, अतहर खान, सलीम मलिक, आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, तसलीम अहमद और खालिद सैफी शामिल हैं।

भाषा

नोमान प्रशांत

प्रशांत


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