दिल्ली दंगे : देवांगना कालिता को दस्तावेज निरीक्षण की अनुमति संबंधी उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक

दिल्ली दंगे : देवांगना कालिता को दस्तावेज निरीक्षण की अनुमति संबंधी उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक

दिल्ली दंगे : देवांगना कालिता को दस्तावेज निरीक्षण की अनुमति संबंधी उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक
Modified Date: July 20, 2026 / 02:59 pm IST
Published Date: July 20, 2026 2:59 pm IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साजिश के मामले में आरोपी देवांगना कालिता को उन दस्तावेजों के निरीक्षण की अनुमति दी थी जिनका अभियोजन पक्ष ने इस्तेमाल नहीं किया था।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने दिल्ली पुलिस की उस याचिका पर कालिता को नोटिस जारी किया, जिसमें पांच जून के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से कहा, ‘‘आप 10 साल में भी अपनी दलीलें पूरी नहीं करेंगे और फिर कहते हैं कि मुकदमे में देरी हो रही है।’’

दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने दलील दी कि आरोप तय होने तक कालिता किसी भी दस्तावेज की हकदार नहीं हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘वे किसी अन्य दस्तावेज की मांग नहीं कर सकते। इस स्तर पर निरीक्षण का उद्देश्य क्या है?’’

कालिता के वकील ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जिन दस्तावेजों पर अभियोजन पक्ष भरोसा नहीं कर रहा है, उनकी सूची भी आरोप तय होने से पहले उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्चतम न्यायालय ने कालिता को नोटिस जारी किया और दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी।

अब इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

पांच जून को दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2020 के दंगों से जुड़े कथित बड़ी साजिश के मामले में आरोप तय करने की कार्यवाही पर लगाई गई अपनी अंतरिम रोक हटा ली थी और निचली अदालत को इस संबंध में अंतिम आदेश पारित करने की अनुमति दे दी थी।

उच्च न्यायालय ने कलिता की उस याचिका को खारिज करते हुए यह रोक हटाई थी, जिसमें उन्होंने पुलिस को मामले से संबंधित कुछ वीडियो और व्हाट्सऐप चैट उपलब्ध कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

हालांकि, अदालत ने कालिता की एक अलग याचिका स्वीकार करते हुए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा इस्तेमाल नहीं किए गए दस्तावेजों का निरीक्षण करने की अनुमति दी थी।

छात्र कार्यकर्ता देवांगना कालिता, नताशा नरवाल, उमर खालिद, शरजील इमाम, जामिया समन्वय समिति की सदस्य सफूरा जरगर, आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन तथा कई अन्य लोगों के खिलाफ फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के सिलसिले में विभिन्न प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

भाषा गोला माधव

माधव


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