दिल्ली दंगे : पांच आरोपियों को जमानत मिलने के बाद एक अन्य आरोपी ने जमानत याचिका दायर की

दिल्ली दंगे : पांच आरोपियों को जमानत मिलने के बाद एक अन्य आरोपी ने जमानत याचिका दायर की

दिल्ली दंगे : पांच आरोपियों को जमानत मिलने के बाद एक अन्य आरोपी ने जमानत याचिका दायर की
Modified Date: January 7, 2026 / 05:21 pm IST
Published Date: January 7, 2026 5:21 pm IST

नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय द्वारा 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में पांच आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद, एक अन्य आरोपी ने यहां की एक अदालत में जमानत के लिए नयी अर्जी दाखिल की है।

आरोपी का तर्क है कि उस पर भी वही समान आरोप हैं, जो जमानत पर रिहा होने वाले आरोपियों पर हैं।

यह जमानत याचिका सलीम मलिक उर्फ ​​मुन्ना ने दायर की है, जो नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए)/एनआरसी विरोधी बैठक के 11 कथित आयोजकों और वक्ताओं में से एक है। अदालत ने इन आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश के तहत आरोप तय किए थे।

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सलीम मलिक की ओर से अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी के समक्ष दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को इसी तरह के आरोपों के तहत आरोपित एक अन्य आरोपी को जमानत दे दी थी और वह भी उसी स्थिति में है।

इसमें कहा गया है कि अभियोजन पक्ष द्वारा मलिक के खिलाफ दायर मामला उन्हें केवल ‘चांद बाग विरोध स्थल पर हुई बैठकों से जुड़े एक स्थानीय कार्यकर्ता’ के रूप में प्रस्तुत करता है जो सह-आरोपी सलीम खान से काफी मिलता-जुलता है, जिसे उच्चतम न्यायालय ने पांच जनवरी को जमानत दी थी।

सीएए/एनआरसी विरोधी बैठक के कथित आयोजक मोहम्मद सलीम खान, सलीम मलिक, मोहम्मद जलालुद्दीन उर्फ ​​​​गुड्डू भाई, शाहनवाज, फुरकान, मोहम्मद अयूब, मोहम्मद यूनुस, अतहर खान, तबस्सुम, मोहम्मद अयाज और उसका भाई खालिद था।

अदालत ने मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए आठ जनवरी की तारीख तय की है।

सलीम मलिक कथित तौर पर 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में एक कार शोरूम में आगजनी की घटना में शामिल था।

इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सोमवार को इनकार कर दिया लेकिन ‘‘भागीदारी के स्तर के क्रम’’ का हवाला देते हुए पांच अन्य को जमानत दे दी और कहा कि मामले में सभी आरोपी एक ही पायदान पर नहीं हैं।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि खालिद और इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। उसने कहा कि ये दोनों जेल में रहेंगे लेकिन अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी जाती है।

न्यायालय ने कहा कि खालिद और इमाम सुरक्षा प्राप्त गवाहों से पूछताछ हो जाने के बाद या आज से एक वर्ष बाद नए सिरे से जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। उसने साथ ही कहा कि खालिद और इमाम की स्थिति दिल्ली दंगों के मामले में अन्य आरोपियों की तुलना में अलग है।

उमर, शरजील और अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का ‘‘मुख्य साजिशकर्ता’’ होने का आरोप है। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय न्याय संहिता (आईपीसी) के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। क्षेत्र में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उमर सहित अन्य आरोपियों को जमानत देने से दो सितंबर को इनकार कर दिया था। इसके बाद आरोपियों ने उस फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था।

दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिकाओं का जोरदार विरोध करते हुए कहा कि दंगे स्वत: नहीं हुए थे बल्कि ये भारत की संप्रभुता पर एक सुनियोजित, पूर्व-नियोजित और सुव्यवस्थित हमला थे।

भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश

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