दिल्ली दंगे: न्यायालय ने यूएपीए मामले में अतहर खान की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा
दिल्ली दंगे: न्यायालय ने यूएपीए मामले में अतहर खान की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा
नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे कथित ‘‘बड़ी साजिश’’ से जुड़े आतंकवाद रोधी कानून यूएपीए के तहत दर्ज मामले में जमानत का अनुरोध करने वाले अतहर खान की याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने खान की ओर से दायर अपील पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। खान ने दिल्ली उच्च न्यायालय के सात जुलाई के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसे जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
पीठ ने कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाता है। आठ सप्ताह बाद मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा।’’
उच्च न्यायालय ने अतहर की उस अपील को खारिज कर दिया था जिसमें उसने अधीनस्थ अदालत के 29 जनवरी के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में उसे मामले में कोई राहत नहीं दी गई थी और कहा गया था कि वह दंगों के दौरान मौतों की साजिश रचने वाले ‘‘मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक’’ था और ‘महज स्थानीय स्तर पर काम करने वाला व्यक्ति’ नहीं था।
अतहर के वकील ने इस आधार पर जमानत का अनुरोध किया था कि वह ‘‘स्थानीय स्तर पर मदद करने वाला व्यक्ति’’ था, जो छह वर्षों से हिरासत में है। वकील ने यह भी दलील दी थी कि समान स्थिति वाले सह-आरोपियों को शीर्ष अदालत से जमानत मिल चुकी है।
उच्च न्यायालय की पीठ ने सह-आरोपियों की जमानत याचिकाओं के संबंध में उच्चतम न्यायालय के निष्कर्षों पर विचार करते हुए कहा था कि अतहर की भूमिका ‘‘स्पष्ट रूप से अलग’’ थी और उसकी तुलना उन आरोपियों से नहीं की जा सकती, जिन्हें शीर्ष अदालत से राहत मिली थी।
अतहर पर दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में चांद बाग में हुए प्रदर्शन के मुख्य साजिशकर्ताओं और आयोजकों में से एक होने का आरोप है। उस पर वहां कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देकर हिंसा के लिए लोगों को उकसाने का भी आरोप है। अतहर पूर्व में कॉल सेंटर में काम करता था।
दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ के अनुसार, अतहर ने कथित तौर पर गुप्त बैठकों में हिस्सा लिया था, जिनमें उसने कहा था कि ‘‘दिल्ली को जलाने का समय आ गया है।’’ उस पर सीसीटीवी कैमरों को नष्ट करने की कार्रवाई में समन्वय करने का भी आरोप है।
जुलाई 2020 में गिरफ्तार किए गए अतहर पर गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसपर फरवरी 2020 के दंगों का ‘‘मुख्य साजिशकर्ता’’ होने का आरोप है। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
ये हिंसा संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), 2019 और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी।
कार्यकर्ता शरजील इमाम, खालिद सैफी और उमर खालिद समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ भी कथित तौर पर बड़ी साजिश से जुड़े मामले में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस का विशेष प्रकोष्ठ कर रहा है।
भाषा आशीष माधव
माधव

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