शीला के सत्ता से जाने के बाद दिल्ली के विकास की रफ्तार ठहर गई: माकन

शीला के सत्ता से जाने के बाद दिल्ली के विकास की रफ्तार ठहर गई: माकन

शीला के सत्ता से जाने के बाद दिल्ली के विकास की रफ्तार ठहर गई: माकन
Modified Date: May 21, 2026 / 02:40 pm IST
Published Date: May 21, 2026 2:40 pm IST

नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन ने दावा किया है कि वर्ष 2013 के आखिर में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के सत्ता से जाने के बाद राष्ट्रीय राजधानी में बुनियादी ढांचे के विकास की रफ्तार ठहर गई तथा परिवहन क्षेत्र में व्यवस्था धाराशायी हो गई।

शीला दीक्षित सरकार में मंत्री रहे माकन ने दिल्ली के बुनियादी ढांचे और परिवहन सेवा को लेकर पांच सवालों की शृंखला की शुरुआत की है। इसके तहत पहले दिन उन्होंने परिवहन सेवा को लेकर कुछ सवाल किए।

कांग्रेस के कोषाध्यक्ष माकन ने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों में दिल्ली सरकार ने ईंधन संकट को लेकर कई सलाह जारी की हैं, मेट्रो लीजिए, साथ में सवारी कीजिए, ग़ैर-ज़रूरी सफ़र कम कीजिए। ये सलाह अपने-आप में ग़लत नहीं हैं। सवाल यह है कि क्या दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन इतना तैयार है कि परिवार जब अपनी गाड़ियां घर पर छोड़कर निकलें, तो उन्हें ढो सके?’’

उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय सरकार के बजट का वह हिस्सा है जिससे मेट्रो लाइन, डिपो, फ़्लाईओवर और सड़कों का निर्माण होता है।

माकन ने कहा, ‘‘पिछले 30 वर्षों में दिल्ली में चार चुनी हुई सरकारें रहीं। हर सरकार ने परिवहन पर पैसा ख़र्च किया, लेकिन असल सवाल यह है कि उसमें से वास्तव में कितने पैसे कुछ बनाने पर खर्च किए गए।’’

उन्होंने दावा किया कि परिवहन क्षेत्र में आम आदमी पार्टी और भाजपा की सरकारों ने कांग्रेस की सरकार की तुलना में कम खर्च किए।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘2013 के अंत में शीला जी ने पद छोड़ा। उसके बाद से, दिल्ली में बुनियादी ढांचे के विकास की रफ़्तार बस ठहर सी गई है। मेट्रो के चौथे चरण को उनकी सरकार ने 2011 में मंजूरी दी थी, लेकिन केंद्र की मंज़ूरी के लिए 2019 तक इंतज़ार करता रहा।’’

माकन के अनुसार, दिल्ली परिवहन निगम की बसों का बेड़ा आज चौदह साल बाद सबसे छोटा है और बजट का जो हिस्सा कभी निर्माण पर ख़र्च होता था, वह अब लगभग ग़ायब है।

भाषा हक हक वैभव

वैभव


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