चिपको आंदोलन की नेत्री गौरा देवी को मरणोपरांत भारत रत्न देने की राज्यसभा में उठी मांग
चिपको आंदोलन की नेत्री गौरा देवी को मरणोपरांत भारत रत्न देने की राज्यसभा में उठी मांग
नयी दिल्ली, दो दिसंबर (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को भाजपा सदस्य महेंद्र भट्ट ने चिपको आंदोलन की नेत्री गौरा देवी को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग की और कहा कि उस आंदोलन ने पर्यावरण सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बना दिया।
भाजपा सदस्य भट्ट ने विशेष उल्लेख के जरिए यह मांग की और कहा कि चिपको आंदोलन गौरा देवी के संघर्षों की कहानी है।
उन्होंने कहा, ‘‘गौरा देवी उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के रैणी गांव की रहने वाली थीं जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए चिपको आंदोलन की शुरुआत की थी।’’
उन्होंने कहा कि चिपको आंदोलन हिमालय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के खिलाफ मातृशक्ति द्वारा पेड़ों के आलिंगन से जुड़ा आंदोलन था, जिसके 51 वर्ष पूरे हो गए हैं। पर्यावरण बचाने के लिए चिपको आंदोलन 1974 में शुरू हुआ था और इस आंदोलन की गूंज भारत सहित पूरे विश्व में सुनी गयी।
भट्ट ने कहा कि चिपको आंदोलन ने देश में पर्यावरण सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बना दिया और यह आंदोलन कई राज्यों में फैला।
भाजपा के ही तेजवीर सिंह ने उत्तर प्रदेश में हाल के महीनों में वायु प्रदूषण और जल प्रबंधन से जुड़ी गंभीर चुनौतियों की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर मेरठ जैसे राज्य के प्रमुख शहर देश के अत्यधिक प्रदूषित शहरों की सूची में लगातार बने हुए हैं।
सिंह ने कहा कि खराब वायु गुणवत्ता न केवल लोगों के स्वास्थ्य को खराब कर रही है बल्कि आर्थिक गतिविधियों, परिवहन और जनजीवन पर भी गहरा असर डाल रही है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण तंत्र में तकनीकी और प्रबंधन से जुड़ी कमियां सामने आई हैं जिनके कारण सुधारों की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है।
उन्होंने प्रदूषित शहरों के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने, औद्योगिक अपशिष्ट निस्तारण और उत्सर्जन की कड़ी निगरानी के लिए विशेष प्रकोष्ठ स्थापित करने तथा भूजल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए राज्यव्यापी अभियान चलाए जाने की मांग की।
भाषा अविनाश माधव
माधव

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