देश में पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार का दर्जा दिए जाने की राज्यसभा में उठी मांग
देश में पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार का दर्जा दिए जाने की राज्यसभा में उठी मांग
नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) सदस्य राघव चड्ढा ने देश में पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार का दर्जा दिए जाने की मांग की और कहा कि बच्चों के लालन-पोषण की जिम्मेदारी सिर्फ मां की ही नहीं, बल्कि साझा दायित्व है।
उच्च सदन में विशेष उल्लेख के जरिए यह मुद्दा उठाते हुए आप सदस्य ने कहा कि अभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 15 दिनों के (पितृत्व) अवकाश का प्रावधान है लेकिन निजी क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के कुल कार्यबल का बडा हिस्सा निजी क्षेत्र में काम करता है।
उन्होंने कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कर्मियों को लंबा अवकाश मिलता है। उन्होंने कहा कि भारत में भी सोच में बदलाव लाने की जरूरत है क्योंकि बच्चों के लालन-पोषण की जिम्मेदारी सिर्फ मां की ही नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी है।
विशेष उल्लेख के जरिए ही भाजपा के भीम सिंह ने राजगीर की विपलाचल पहाड़ी के संरक्षण की मांग की। वहीं समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन ने बंजारा समुदाय को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि बंजारा समुदाय अभी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में है लेकिन समुदाय को उसका अधिकार दिलाने के लिए उसे अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए।
भाजपा सदस्य माया नारोलिया ने मध्यप्रदेश में भारी बारिश से फसलों को हुए अत्यधिक नुकसान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बेमौसम बारिश के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ जो कटाई के लिए तैयार थीं। उन्होंने किसानों को राहत प्रदान करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
बीजू जनता दल के निरंजन बिशी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के फर्जी प्रमाण पत्रों का मुद्दा उठाया। भाजपा सदस्य और महाराजा संजाओबा लेशंबा सहित कुछ अन्य सदस्यों ने भी विशेष उल्लेख के जरिए लोक महत्व से जुड़े अपने मुद्दे उठाए।
भाषा अविनाश सुभाष
सुभाष

Facebook


