महिला आरक्षण और परिसीमन संबंधी विधेयक पारित हुआ तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा: प्रियंका
महिला आरक्षण और परिसीमन संबंधी विधेयक पारित हुआ तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा: प्रियंका
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को सत्ता बनाए रखने के लिए बहाने के तौर पर उपयोग करने का आरोप लगाया तथा दावा किया कि यदि परिसीमन के प्रावधान वाला विधेयक पारित हो गया तो देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा।
उन्होंने महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित विधेयकों पर चर्चा में भाग लेते हुए यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को लोकसभा के वर्तमान संख्याबल 543 के आधार पर महिला आरक्षण को लागू करना चाहिए और जाति जनगणना के बिना परिसीमन नहीं होना चाहिए।
प्रियंका ने अपने भाषण के दौरान, गृह मंत्री अमित शाह के हंसने का उल्लेख किया और हुए उन पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘गृह मंत्री हंस रहे हैं, पूरी योजना बना रखी है…यदि आज चाणक्य जिंदा होते तो चौंक जाते आपकी राजनीतिक कुटिलता पर। गृह मंत्री जी हंस रहे हैं, मेरी बात से सहमत हैं।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने ‘‘इस वर्ग-उस वर्ग’’ की बात कर ओबीसी के विषय को हल्के में लिया, जो उचित नहीं है।
कांग्रेस सांसद ने सवाल किया, ‘‘क्या प्रधानमंत्री जातिगत जनगणना से घबरा रहे हैं कि जब असल आंकड़ें आएंगे तो पता चलेगा कि ओबीसी वर्ग कितना बड़ा और कितना मजबूत है?’’
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह विधेयक लाई है क्योंकि वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भागीदारी नहीं देना चाहती है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘2011 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाकर प्रधानमंत्री मोदी ओबीसी वर्ग का हक छीनना चाह रहे हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी ऐसा कभी नहीं होने देगी।’’
उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने जिस ‘‘राजनीति की बू’’ का जिक्र किया, वह इस विधेयक में पूरी तरह घुली हुई है।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि अगर यह विधेयक पारित होता है तो समझ लीजिए कि देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप (प्रधानमंत्री) महिलाओं का सम्मान करते हैं तो महिलाओं का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं करते तथा यह कदम आपके पद और गरिमा के अनुकूल नहीं है।’’
केरल के वायनाड से लोकसभा सदस्य ने कहा, ‘‘अगर प्रधानमंत्री ने यह ऐतिहासिक कदम ईमानदारी से उठाया होता तो पूरा सदन इसका समर्थन करता।’’
कांग्रेस महासचिव ने इस बात का उल्लेख किया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि महिला आरक्षण को 2029 से लागू किया जाए, जो अब सरकार करने की बात कर रही है।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री यहां (सदन में) भले ही राहुल जी का मजाक बनाते हैं, लेकिन घर जाकर उनकी बातों पर गौर करते हैं।’’
प्रियंका ने महिला आरक्षण के ऐतिहासिक प्ररिप्रेक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘हमारे देश की राजनीतिक व्यवस्था में महिला आरक्षण लागू करना एक अनोखा कदम था। पंचायतों और नगर पालिकाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान कांग्रेस की सरकार ने राजीव गांधी जी के नेतृत्व में संसद में पेश किया था। लेकिन उस समय ये प्रावधान पारित नहीं हो पाए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आज प्रधानमंत्री जी ने भी इसका जिक्र किया लेकिन हमेशा की तरह उन्होंने आधी बात ही बताई। प्रधानमंत्री जी ने बताया कि उस समय इस प्रावधान का विरोध हुआ, लेकिन यह नहीं बताया कि किसने विरोध किया….सच्चाई यह है कि तब आपने (भाजपा) ही इस विधेयक का विरोध किया था।’’
प्रियंका ने कहा, ‘‘पी.वी नरसिंह राव जी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने इस कानून को सदन में पारित कर लागू किया। आज इस कानून के चलते ही 40 लाख पंचायत प्रतिनिधियों में से 15 लाख महिलाएं हमारे लोकतंत्र में भागीदार हैं।’’
उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी समस्याओं से घिरे हुए हैं और उनके ऊपर बहुत अंतरराष्ट्रीय दबाव है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘हालात ये हैं कि महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक कदम को उन्होंने सत्ता बनाए रखने का एक कमजोर बहाना बनाया है। प्रधानमंत्री मोदी जातिगत जनगणना को नकारते हुए एक ऐसी संसद बनाना चाहते हैं, जहां अभिव्यक्ति के साथ ही पिछड़े वर्गों और प्रदेशों की समानता का भी अभाव होगा।’’
उन्होंने सवाल किया, ‘‘आखिर आज इन्हीं 543 लोकसभा सीटों में से महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता? इन्हीं सीटों में एससी, एसटी, ओबीसी महिलाओं को उचित आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता?’’
प्रियंका ने कहा, ‘‘यह आरक्षण (विधेयक) आज ही पारित हो सकता है, इससे बेवजह के प्रक्रियाहीन परिसीमन से देश का नुकसान भी नहीं होगा।’’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ईमानदारी दिखाएं तो महिला आरक्षण को लोकसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर लागू किया जा सकता है।
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