डेरेक ओ’ब्रायन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने से जुड़े प्रस्ताव को फिर से लाने की मांग की

डेरेक ओ’ब्रायन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने से जुड़े प्रस्ताव को फिर से लाने की मांग की

डेरेक ओ’ब्रायन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने से जुड़े प्रस्ताव को फिर से लाने की मांग की
Modified Date: September 23, 2026 / 02:42 pm IST
Published Date: September 23, 2026 2:42 pm IST

नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने बुधवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाले पांच महीने पुराने प्रस्ताव को दोबारा लाने का आह्वान किया।

तृणमूल नेता की यह मांग उस मीडिया रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान दो चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के कई फैसलों पर आपत्ति जताई थी।

ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए चालू वर्ष के अप्रैल महीने में राज्यसभा के सभापति को सौंपे गए इस प्रस्ताव पर 70 से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे, जो सीईसी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक 50 सदस्यों के न्यूनतम समर्थन से अधिक है।

यह प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत लाया गया था, जिसमें सीईसी को उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाने का प्रावधान है जैसे उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है।

ओ’ब्रायन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘…पांच महीने पहले, राज्यसभा के 60 से अधिक सांसदों ने — जबकि केवल 50 की आवश्यकता थी — सभापति को पत्र लिखकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव पेश किया था।’’

राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘‘वह पांच महीने पहले की बात थी। आज इस बड़े समाचार के सामने आने के बाद, जिसमें पता चला है कि दो निर्वाचन आयुक्तों ने सीईसी की कई कार्रवाइयों पर आपत्ति जताई थी, अब समय आ गया है कि सीईसी पर महाभियोग चलाने और लोकतंत्र को बचाने के लिए राज्यसभा के उस नोटिस को पुन:जीवित किया जाए।’’

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी पोस्ट कर कहा, ‘‘लोकतंत्र को बचाने के लिए सीईसी पर महाभियोग चलाओ।’’

ओ’ब्रायन की यह टिप्पणी ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाताओं के नाम को जोड़ने, हटाने, बहाल करने और मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव सहित आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि ये फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों की जानकारी के बिना लिए गए थे।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के सभी फैसले, जिनमें एसआईआर भी शामिल है, सर्वसम्मति से और दोनों चुनाव आयुक्तों तथा मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी से लिए गए हैं।

सीईसी कुमार को हटाने की मांग वाले इस नोटिस में उनके कार्यों के निर्वहन में ‘‘साबित कदाचार’’ का आरोप लगाया गया था और 15 मार्च 2026 के बाद के फैसलों व कार्रवाइयों का हवाला दिया गया था। विपक्ष निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में संशोधन को लेकर लगातार आलोचना करता रहा है।

भाषा मनीषा संतोष

संतोष


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