ओबीसी के लिए आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ का निर्धारण केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं : न्यायालय

ओबीसी के लिए आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' का निर्धारण केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं : न्यायालय

ओबीसी के लिए आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ का निर्धारण केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं : न्यायालय
Modified Date: March 12, 2026 / 06:40 pm IST
Published Date: March 12, 2026 6:40 pm IST

नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ का निर्धारण केवल माता-पिता की आय के आधार पर तय नहीं किया जा सकता है और आरक्षण तय करने के लिए निजी संस्थानों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के समान स्थिति वाले कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों से अलग मानना ​​शत्रुतापूर्ण भेदभाव के बराबर होगा।

न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा एवं आर महादेवन की पीठ ने भारत संघ की ओर से दायर अपीलों को खारिज कर दिया, जबकि दिल्ली, मद्रास और केरल के उच्च न्यायालयों के उन निर्णयों को बरकरार रखा, जिनमें सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए ओबीसी (नॉन-क्रीमी लेयर) लाभ का दावा करने वाले उम्मीदवारों की पात्रता से संबंधित प्रावधान किये गये थे।

पीठ ने कहा, ‘‘वर्तमान मामलों के विशिष्ट तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायालय द्वारा अपनाया गया यह तर्क कि आरक्षण के लिए पात्रता का निर्णय करते समय निजी संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के समान स्थिति वाले कर्मचारियों के साथ सरकारी कर्मचारियों और उनके आश्रितों से अलग व्यवहार करना शत्रुतापूर्ण भेदभाव के बराबर होगा।

इसने कहा कि ऐसा दृष्टिकोण निश्चित रूप से इस न्यायालय के विश्वास को मजबूत करता है।

उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि किसी उम्मीदवार के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में क्रीमी लेयर या नॉन-क्रीमी लेयर में आने का निर्धारण केवल उसकी आय के आधार पर ही नहीं किया जा सकता।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जाति भले ही ऐतिहासिक रूप से पिछड़ेपन का सूचक हो, लेकिन इसे पिछड़ेपन का एकमात्र निर्धारक नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछड़े वर्गों में क्रीमी लेयर को शामिल न करना केवल नीतिगत प्राथमिकता का मामला नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक अनिवार्यता है जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण का लाभ उन लोगों तक पहुंचे जो सही मायने में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हैं।’’

पीठ ने कहा, ‘‘यह सिद्धांत पिछड़े वर्गों के अपेक्षाकृत उन्नत वर्गों को आरक्षण के लाभों का दुरुपयोग करने से रोकता है, ताकि आरक्षण जिस संवैधानिक योजना का एक हिस्सा है, उसके उद्देश्य और प्रयोजन का पालन किया जा सके।’’

ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर श्रेणी के तहत आरक्षण का दावा करने वाले कई सिविल सेवा परीक्षा अभ्यर्थियों ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में याचिका दायर की थी।

भाषा रंजन नरेश

नरेश


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