डीएफएस ने हर इमारत में ‘स्मोक डिटेक्टर’ व ‘स्प्रिंकलर सिस्टम’ लगाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिल्ली सरकार को भेजा

डीएफएस ने हर इमारत में ‘स्मोक डिटेक्टर’ व ‘स्प्रिंकलर सिस्टम’ लगाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिल्ली सरकार को भेजा

डीएफएस ने हर इमारत में ‘स्मोक डिटेक्टर’ व ‘स्प्रिंकलर सिस्टम’ लगाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिल्ली सरकार को भेजा
Modified Date: June 10, 2026 / 09:08 pm IST
Published Date: June 10, 2026 9:08 pm IST

नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) दिल्ली में एक महीने के भीतर आग लगने की दो विनाशकारी घटनाओं में 31 लोगों की जान जाने के बाद, दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) ने सभी इमारतों में ‘स्मोक डिटेक्टर’ और ‘स्प्रिंकलर सिस्टम’ (पानी छिड़कने वाली प्रणाली) को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव दिया है।

‘स्मोक डिटेक्टर’ ऐसा सुरक्षा उपकरण है जो हवा में धुएं के कणों या आग के धुएं को महसूस करके अलार्म बजाता है।

डीएफएस का कहना है कि इस कदम से आग का जल्द पता चलने और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से आग से होने वाली मौतों में 97 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है।

यह प्रस्ताव विवेक विहार में तीन मई को एक रिहायशी इमारत में आग लगने की घटना के बाद दिल्ली सरकार को सौंपा गया था। इस हादसे में दो परिवारों के नौ सदस्यों की मौत हो गई थी, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था। यह आग एयर-कंडीशनर (एसी) में कथित तौर पर हुए विस्फोट के कारण भड़की थी।

इस सिफारिश की अहमियत तब और बढ़ गई जब तीन जून को दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में आग लगने की एक और बड़ी घटना में 22 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 13 विदेशी नागरिक शामिल थे।

अधिकारियों के अनुसार, दोनों में से किसी भी इमारत में ‘स्मोक डिटेक्टर’ या ‘स्प्रिंकलर सिस्टम’ नहीं थे, जो शुरुआती चरण में ही वहां मौजूद लोगों को सतर्क कर देते या आग के घातक होने से पहले उसे काबू करने में मदद करते।

डीएफएस के मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभिलाष मलिक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि “हर घर सुरक्षित, भारत विकसित” प्रस्ताव के तहत, दिल्ली की सभी इमारतों में ‘स्मोक डिटेक्टर’ लगाना आवश्यक होगा, जो लगभग 15 सेकंड के भीतर धुएं का पता लगा सकते हैं। इसके साथ ही ऐसे ‘स्प्रिंकलर सिस्टम’ भी लगाने होंगे जो तापमान 68 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने पर सक्रिय हो जाते हैं।

मलिक ने कहा, “इसका उद्देश्य आग को उसके शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करना और लोगों को वहां से सुरक्षित बाहर निकलने के लिए महत्वपूर्ण समय प्रदान करना है।”

उन्होंने कहा कि आधुनिक इमारतें वेंटिलेशन (हवा की आवाजाही) की कमी, एयर-कंडीशनर और सिंथेटिक सामग्रियों के अत्यधिक उपयोग और फर्श से छत की कम ऊंचाई जैसे कारकों के कारण आग के तेजी से फैलने के प्रति काफी संवेदनशील हो गई हैं।

मलिक ने कहा कि एक दशक पहले, किसी आग के “फ्लैशओवर” चरण (जब पूरा कमरा आग की लपटों से घिर जाता है और बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है) तक पहुंचने का समय लगभग 15 से 17 मिनट था। आज, वह समय घटकर केवल तीन से पांच मिनट रह गया है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में औसतन हर साल आग से करीब 100 मौतें दर्ज की जाती हैं और प्रस्तावित उपायों से इस संख्या को संभावित रूप से घटाकर सालाना लगभग तीन मौतों तक लाया जा सकता है।

डीएफएस ने चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वयन योजना का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत नई इमारतों के लिए तुरंत इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा, जबकि मौजूदा ढांचों को इन प्रणालियों को स्थापित करने के लिए तीन साल तक का समय दिया जाएगा।

प्रस्ताव में यह भी सिफारिश की गई है कि सरकार संपत्ति मालिकों में इसका अनुपालन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन, सब्सिडी और नीतिगत उपाय पेश करे।

डीएफएस के अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में करीब 72 लाख इमारतें हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 10,000 इमारतों में ही ‘स्मोक डिटेक्टर’ और ‘स्प्रिंकलर सिस्टम’ लगे हुए हैं।

भाषा नोमान नोमान प्रशांत

प्रशांत


लेखक के बारे में