29 अप्रैल के बाद डीजल एवं पेट्रोल के दाम बढ़ाएं जाएंगे : तृणमूल सांसद गोखले ने रास में किया दावा

29 अप्रैल के बाद डीजल एवं पेट्रोल के दाम बढ़ाएं जाएंगे : तृणमूल सांसद गोखले ने रास में किया दावा

29 अप्रैल के बाद डीजल एवं पेट्रोल के दाम बढ़ाएं जाएंगे : तृणमूल सांसद गोखले ने रास में किया दावा
Modified Date: March 27, 2026 / 03:29 pm IST
Published Date: March 27, 2026 3:29 pm IST

नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) राज्यसभा में शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद ने दावा किया कि पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के कारण सरकार पेट्रोल एवं डीजल के दामों में वृद्धि नहीं कर रही है तथा 29 अप्रैल के बाद इनके दाम बढ़ाए जाएंगे।

उच्च सदन में चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने कहा कि सरकार पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद शुल्क कम करने के लिए अपनी पीठ थपथपा रही है। उन्होंने प्रश्न किया कि पिछले चार साल से जब कच्चे तेल के दाम कम थे तो क्या सरकार ने आम उपभोक्ता को उसका लाभ पहुंचाया था?

उन्होंने वित्त मंत्री से पूछा कि क्या वह इस बात का आश्वासन दे सकती हैं कि कुछ राज्यों में होने वाले चुनाव के बाद डीजल एवं पेट्रोल के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे? उन्होंने कहा कि 29 अप्रैल को चुनाव होने के बाद इनके दाम बढ़ा दिए जाएंगे।

गौरतलब है कि नौ अप्रैल से लेकर 29 अप्रैल तक तमिलनाडु, असम, पुडुचेरी पश्चिम बंगाल एवं केरल विधानसभा चुनाव होंगे। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव होंगे और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा।

गोखले ने कहा कि सरकार एक देश एक चुनाव की बात करती है किंतु बार बार राज्यों में चुनाव होने से आम उपभोक्ता को यह लाभ तो मिलता है कि चुनाव तक सरकार दाम नहीं बढ़ाती।

उन्होंने दावा किया कि देश में केवल नौ दिन की कच्चे तेल की आपूर्ति रह गयी है। उन्होंने कहा कि भारत में 74 दिन का तेल रिजर्व रह गया है।

तृणमूल सांसद ने केंद्र पर आरोप लगाया कि उसने पश्चिम बंगाल के लोगों का नौ लाख करोड़ रूपये से अधिक धन दबा रखा है तथा राज्य में अघोषित आपातकाल लगा रखा है।

द्रमुक के पी विल्सन ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि यह सरकार ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे के साथ सत्ता में आयी थी किंतु आज यह बदल कर हो गया है, ‘‘सबका बोझ इनका विकास’’।

उन्होंने कहा कि यह वित्त विधेयक नारों के अलावा कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती आय असमानता तथा सरकार की मध्यम एवं कम आय वर्ग के लोगों के प्रति बेपरवाही, चिंता का विषय है।

विल्सन ने कहा कि मौजूदा नीतियों के अनुसार दक्षिण के राज्यों से अधिक कर वसूला जाता है किंतु केंद्र की ओर से उत्तर भारत के कई राज्यों को अधिक धन आवंटित किया जाता है।

भाषा

माधव मनीषा

मनीषा


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