अपनी कलाकृतियों से संस्कृतियों का अंतर पाट रहे हैं राजनयिक खोबरागड़े

अपनी कलाकृतियों से संस्कृतियों का अंतर पाट रहे हैं राजनयिक खोबरागड़े

अपनी कलाकृतियों से संस्कृतियों का अंतर पाट रहे हैं राजनयिक खोबरागड़े
Modified Date: April 4, 2026 / 09:20 pm IST
Published Date: April 4, 2026 9:20 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

(कुणाल दत्त)

नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) एक राजनयिक का जीवन मुख्य रूप से द्विपक्षीय बैठकों और समझौतों पर हस्ताक्षर करने में व्यतीत होता है, लेकिन स्पेन में भारत के राजदूत जयंत खोबरागड़े कलम और चित्रकारी दोनों का समान सहजता से उपयोग करते हैं।

भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 1995 बैच के अधिकारी वर्तमान में यहां त्रावणकोर हाउस में पिछले लगभग 30 वर्षों में बनाई गई अपनी कलाकृतियों की एक प्रदर्शनी की मेजबानी कर रहे हैं, जिसमें कई ऐसी कलाकृतियां भी शामिल हैं जिन्हें उन्होंने अपने विभिन्न राजनयिक कार्यकालों के दौरान विदेश में रहते हुए चित्रित किया था।

‘जर्नी विद द डिवाइन फ्लो’ शीर्षक वाली इस प्रदर्शनी में 45 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें प्रकृति को विभिन्न रंगों में, पेड़ों को, भगवान राम और रावण के बीच एक विशाल कैनवास पर युद्ध को, भगवान कृष्ण को राधा और गोपियों के साथ होली खेलते हुए, साथ ही फ्लेमेंको नृत्य और स्पेनिश संगीत से प्रेरित कलाकृतियों को दर्शाया गया है।

प्रदर्शनी में प्रदर्शित सबसे पुरानी पेंटिंग ‘बुद्ध मस्ट लॉफ’ है, जो 1997 में कैनवास पर बनाया गया तैल चित्र है, जिसे राजनयिक-कलाकार प्रदर्शनी में प्रदर्शित अपनी “एकमात्र राजनीतिक कृति” कहते हैं।

खोबरागाडे ने शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “कला मेरे दिल के बेहद करीब है। कूटनीति मेरा पेशा है, संगीत मेरा जुनून है, लेकिन चित्रकला मेरे लिए जीवन का एक अभिन्न अंग है। मैं साढ़े तीन दशकों से चित्रकला कर रहा हूं। यह मेरी 15वीं प्रदर्शनी है और दिल्ली में दूसरी।”

पिछले साल स्पेन में भारत के राजदूत के रूप में नियुक्त किए गए इस राजनयिक ने जकार्ता स्थित आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का संघ) और किर्गिस्तान में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया था, इसके अलावा उन्होंने मॉस्को, मैड्रिड, अल्माटी और बिश्केक में भारतीय दूतावासों में राजनयिक कार्यभार भी संभाले थे।

भाषा प्रशांत रंजन

रंजन


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