#SarkarOnIBC24 : बंगाल.. जारी है बवाल! मुर्शिदाबाद हिंसा रिपोर्ट पर टीएमसी और बीजेपी में ‘रार’, वीडियो के जरिए समझें पूरा मामला

मुर्शिदाबाद हिंसा रिपोर्ट पर टीएमसी और बीजेपी में 'रार'! 'Dispute' between TMC and BJP over Murshidabad violence report

#SarkarOnIBC24 : बंगाल.. जारी है बवाल! मुर्शिदाबाद हिंसा रिपोर्ट पर टीएमसी और बीजेपी में ‘रार’, वीडियो के जरिए समझें पूरा मामला
Modified Date: May 6, 2025 / 12:08 am IST
Published Date: May 6, 2025 12:02 am IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा को लेकर राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने एक रिपोर्ट जारी की है। जब से ये रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है। बंगाल में बवाल मचा हुआ है। रिपोर्ट में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए है, जिसे लेकर विपक्ष हमलावर है तो वहीं सीएम ममता बनर्जी ने भी पलटवार किया है। चलिए जानते हैं कि आखिर क्या लिखा है इस रिपोर्ट में..

पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद वक्फ कानून के विरोध में भड़की हिंसा के करीब महीने भर बाद फिर सुर्खियों में है। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने हिंसा को लेकर केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी है.. जिसमें TMC सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस रिपोर्ट का ही असर है कि सीएम ममता बनर्जी को सोमवार को मुर्शिदाबाद का दौरा करने पर मजबूर होना पड़ा। गवर्नर सीवी आनंद बोस की केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौपी रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल को कट्टरपंथ और उग्रवाद से सबसे ज्यादा खतरा है…जो खासतौर पर बांग्लादेश से सटे मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों में ज्यादा है, क्योंकि इन जिलों में हिंदू आबादी अल्पसंख्यक हैं.. गवर्नर के मुताबिक मुर्शिदाबाद हिंसा प्री-प्लांड थी। राज्य सरकार को पहले से खतरे का अंदेशा था.. राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने में कोऑर्डिनेशन की कमी थी।

गवर्नर की रिपोर्ट में मुर्शिदाबाद हिंसा के सिर्फ कारणों का जिक्र नहीं है बल्कि केंद्र सरकार को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ सुझाव भी दिए गए हैं, जिनके मुताबिक बांग्लादेश से सटे सीमावर्ती जिलों में सेंट्रल फोर्सेस की चौकियां बनाई जाएं। मुर्शिदाबाद हिंसा की जांच के लिए एक आयोग गठित हो.. केंद्र सरकार ‘संवैधानिक विकल्पों’ पर विचार करे, ताकि राज्य में कानून व्यवस्था बनी रहे.. हालात बिगड़ने पर आर्टिकल 356 के जरिए राष्ट्रपति शासन पर विचार किया जाए.. हालांकि राज्यपाल ने ये साफ किया कि अभी इसकी जरूरत नहीं है।

 ⁠

बता दें कि मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के विरोध में 11 और 12 अप्रैल को हिंसा हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने बसें जलाईं थी और पथराव हुआ था, जिसमें 3 लोग मारे गए थे और कई हिंदू परिवारों को इलाके से पलायन करना पड़ा था। जाहिर है राज्यपाल आनंद बोस 19 अप्रैल को हिंसा प्रभावित मुर्शिदाबाद पहुंचे थे और हिंसा पीड़ित परिवारों से मिलकर ये रिपोर्ट तैयार की, जिसका असर है कि सीएम ममता बनर्जी को सोमवार को मुर्शिदाबाद का दौरा करना पड़ा। ममता ने लोगों से साम्प्रदायिक हिंसा से बचने की अपील की। मुर्शिदाबाद हिंसा पर गवर्नर की रिपोर्ट और ममता बनर्जी के दौरे पर सियासत भी गरमाई। बीजेपी नेताओं ने निशाना साधा।

पश्चिम बंगाल में करीब 30% आबादी मुस्लिम है। इनकी सबसे ज्यादा तादाद मुर्शिदाबाद, मालदा और नॉर्थ दिनाजपुर जिलो में है। इसे TMC का कोर वोटर माना जाता है। मुर्शिदाबाद में साम्प्रदायिक हिंसा और प्रदर्शनों का पुरानी इतिहास रहा है। चाहे 2019 का नागरिकता संशोधन कानून हो या 2024 में रामनवमी का जुलूस, तब हिंसा में ना केवल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहंचा था बल्कि आम लोग और पुलिस जवान घायल हुए थे। इसके बाद भी सरकार और प्रशासन ने सबक नहीं लिया जिसके चलते हिंसा भड़की अब इस पर सियासत जोरों पर है।


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।