मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ ‘सुनियोजित नकारात्मक अभियान’ चला रही द्रमुक और अन्नाद्रमुक: मंत्री

मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ ‘सुनियोजित नकारात्मक अभियान’ चला रही द्रमुक और अन्नाद्रमुक: मंत्री

मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ ‘सुनियोजित नकारात्मक अभियान’ चला रही द्रमुक और अन्नाद्रमुक: मंत्री
Modified Date: September 29, 2026 / 08:11 pm IST
Published Date: September 29, 2026 8:11 pm IST

कोयंबटूर, 29 सितंबर (भाषा) तमिलनाडु सरकार में मंत्री आधव अर्जुन ने मंगलवार को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) पर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ ‘‘सुनियोजित नकारात्मक अभियान’’ चलाने का आरोप लगाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए प्रचार के दौरान दोनों प्रमुख द्रविड़ दलों ने विजय को निशाना बनाते हुए व्यक्तिगत हमले किए।

मंत्री ने आरोप लगाया कि इन हमलों ने संकेत दिया कि दोनों दलों के बीच ‘‘मौन सहमति’’ हो सकती है।

राज्य के लोक निर्माण एवं खेल विकास मंत्री ने दावा किया कि छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए विजय के प्रचार अभियान को अच्छा समर्थन मिल रहा है और इससे तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के दमदार प्रदर्शन की संभावना बनी है।

मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि द्रमुक ने वैचारिक मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय बदनाम करने, अश्लील टिप्पणियां करने और व्यक्तिगत हमले करने का रास्ता अपनाया है।

उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक विरोधियों की निजी जिंदगी पर अभद्र टिप्पणियां और हमलों का इस्तेमाल दिवंगत मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि से लेकर उनके पोते और विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन तक पार्टी के नेतृत्व की पहचान रहा है।

अर्जुन ने अन्नाद्रमुक पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी अपने दिवंगत नेताओं एम. जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता के सिद्धांतों से भटक गई है तथा अब पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी का परिवार पार्टी को नियंत्रित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में वफादार पार्टी कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है।

अर्जुन ने आरोप लगाया कि द्रमुक और पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली अन्नाद्रमुक ने प्रभावी रूप से एक ‘‘गठजोड़’’ बना लिया है तथा दोनों दल अपने हित साधने व राजनीतिक विरोधियों को किनारे करने के लिए एक जैसे नकारात्मक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भाषा जितेंद्र पवनेश

पवनेश


लेखक के बारे में