चिकित्सकों ने एमबीबीएस छात्रों के लिए ‘नेक्स्ट’ लागू करने की मांग की

चिकित्सकों ने एमबीबीएस छात्रों के लिए ‘नेक्स्ट’ लागू करने की मांग की

चिकित्सकों ने एमबीबीएस छात्रों के लिए ‘नेक्स्ट’ लागू करने की मांग की
Modified Date: April 4, 2026 / 06:59 pm IST
Published Date: April 4, 2026 6:59 pm IST

(पायल बनर्जी)

नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) रेजिडेंट चिकित्सक संघ और राष्ट्रीय राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के छात्र संघ सदस्यों ने दिल्ली, नागपुर और पटना स्थित एम्स तथा आरएमएल के संकाय सदस्यों के साथ मिलकर एमबीबीएस छात्रों के लिए ‘नेशनल एक्जिट टेस्ट’ (नेक्स्ट) के क्रियान्वयन की मांग की है।

उन्होंने कहा कि यह मौजूदा विश्वविद्यालय और स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षाओं की कमियों को दूर करता है तथा एक सुव्यवस्थित, योग्यता-आधारित मूल्यांकन प्रणाली प्रदान करता है।

पिछले महीने ‘जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर’ में प्रकाशित एक संपादकीय में चिकित्सकों ने कहा कि स्नातक चिकित्सा के लिए वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली असंगत और खंडित है।

उन्होंने कहा कि ये परीक्षाएं अक्सर योग्यता-आधारित प्रशिक्षण के अनुरूप नहीं होतीं। लेखकों ने कहा कि नेक्स्ट का उद्देश्य एक समान, पारदर्शी और चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक मूल्यांकन ढांचा प्रस्तुत करना है।

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019 के माध्यम से शुरू की गई तथा 2023 की राजपत्र अधिसूचना में और स्पष्ट किए गए नेक्स्ट को चिकित्सा क्षेत्र में तीन मौजूदा परीक्षाओं – अंतिम एमबीबीएस परीक्षा, स्नातकोत्तर सीटों के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट-पीजी), और भारत में चिकित्सा सेवा देने के लिए विदेशी चिकित्सा स्नातकों के लिए विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (एफएमजीई) को प्रतिस्थापित करने के लिए एक एकल अर्हता परीक्षा के रूप में परिकल्पित किया गया था।

हालांकि, लेखकों ने कहा कि परीक्षा कई बार स्थगित हो चुकी है, जिससे अनिश्चितता पैदा हो रही है और सुधारों में देरी हो रही है। संपादकीय में बताया गया है कि तत्काल कार्यान्वयन क्यों आवश्यक है।

इसमें कहा गया कि नेक्स्ट मूल्यांकन की वैधता और विश्वसनीयता में सुधार कर सकता है, छात्रों के सीखने में सहायता कर सकता है और संस्थागत पारदर्शिता बढ़ा सकता है। इसका उद्देश्य अधिक सक्षम चिकित्सा कार्यबल के निर्माण में सहायता करना भी है।

लेखकों के अनुसार, विश्वविद्यालय आधारित एमबीबीएस की अंतिम परीक्षाओं की गुणवत्ता और निष्पक्षता में व्यापक भिन्नता है। सैद्धांतिक प्रश्नपत्र अक्सर व्यक्तिपरक होते हैं। विषयवस्तु हमेशा राष्ट्रीय दक्षताओं के अनुरूप नहीं होती और मूल्यांकन मानक विभिन्न संस्थानों में भिन्न-भिन्न होते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे यह निर्धारित करने में असंगति पैदा होती है कि कोई स्नातक चिकित्सीय प्रैक्टिस करने के लिए तैयार है या नहीं।’’

लेखकों ने यह भी कहा कि वर्तमान स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षाएं संपूर्ण एमबीबीएस पाठ्यक्रम का आकलन करने के लिए लगभग 200 बहुविकल्पीय प्रश्नों के अपेक्षाकृत छोटे समूह पर निर्भर करती हैं।

यह सीमित नमूना विश्वसनीयता को कम करता है और अवसर की भूमिका को बढ़ाता है। स्मरण आधारित प्रश्नों पर ध्यान केंद्रित करने से नैदानिक ​​​​शिक्षा की तुलना में कोचिंग आधारित तैयारी को बढ़ावा मिलता है।

वर्तमान में छात्रों को दो बहुत अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती है। विश्वविद्यालय स्तरीय एमबीबीएस की अंतिम परीक्षा सिद्धांत प्रधान और लंबे उत्तरों पर आधारित होती है, जबकि स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा पूरी तरह से बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित होती है।

लेखकों ने कहा, ‘‘यह असंगति छात्रों को अलग-अलग रणनीतियां अपनाने के लिए मजबूर करती है और तनाव बढ़ाती है।’’

‘नेक्स्ट’ का उद्देश्य इन दोनों को एक मानकीकृत परीक्षा में एकीकृत करना है।

उन्होंने कहा, ‘‘नेक्स्ट केवल प्रारूप में बदलाव नहीं है। यह बदलाव नैदानिक ​​रूप से उन्मुख मूल्यांकन की ओर है जिसमें प्रश्नों का एक बड़ा और एकसमान समूह शामिल है।’’

उन्होंने कहा कि इससे सीखने के परिणाम बेहतर होंगे और मानक स्तर बढ़ेगा। लेखकों ने बताया कि नेक्स्ट के चरण एक में नैदानिक ​​उदाहरणों और व्यावहारिक तर्क पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का एक बड़ा समूह शामिल है।

यह वास्तविक जीवन में निर्णय लेने की प्रक्रिया को दर्शाता है। नेक्स्ट के चरण दो का उद्देश्य संरचित नैदानिक ​​परीक्षाओं के माध्यम से व्यावहारिक कौशल, संचार और नैदानिक ​​दक्षता का आकलन करना है, हालांकि इसके विवरण अभी प्रतीक्षित हैं।

उन्होंने कहा कि नेक्स्ट सभी छात्रों पर लागू होता है, जिनमें सरकारी और निजी कॉलेजों के विद्यार्थियों के अलावा विदेश से चिकित्सा की पढ़ाई करने वाले छात्र शामिल हैं।

लेखकों ने कहा कि सभी उम्मीदवारों का मूल्यांकन एक ही राष्ट्रीय मानक के आधार पर करने से चिकित्सा प्रशिक्षण में जनता का विश्वास मजबूत होता है और यह सुनिश्चित होता है कि प्रत्येक लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक, चाहे उसने कहीं से भी शिक्षा प्राप्त की हो, योग्यता का एक समान स्तर प्रदर्शित करे।

संपादकीय में कहा गया है कि एक एकीकृत परीक्षा से विभिन्न प्रारूपों वाली कई परीक्षाओं की तैयारी का बोझ कम होगा। नेक्स्ट के चरण एक के अंकों का उपयोग न केवल स्नातकोत्तर प्रवेश के लिए बल्कि सरकारी नौकरी के पदों और विभिन्न छात्रवृत्ति या फेलोशिप के अवसरों के लिए भी किया जा सकता है।

इसमें कहा गया है कि एक ही अंक से पारदर्शिता बढ़ेगी और चयन में मनमानी कम होगी।

संपादकीय में इस बात पर जोर दिया गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर एक समान मानक कॉलेजों, विशेष रूप से नए और निजी संस्थानों को, मापने योग्य छात्रों के नतीजों के माध्यम से अपने प्रशिक्षण की गुणवत्ता प्रदर्शित करने में सक्षम बनाएगा।

पिछले दो दशकों में इंजीनियरिंग, प्रबंधन और दंत चिकित्सा शिक्षा के अनुभवों से पता चलता है कि मजबूत मूल्यांकन तंत्र के अभाव में तीव्र विस्तार गुणवत्ता को कैसे प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय में कहा गया है कि इन क्षेत्रों के कई संस्थानों में कठोर छात्र मूल्यांकन प्रक्रियाओं का अभाव था और वे धीरे-धीरे सार्थक शिक्षा को बढ़ावा देने के बजाय डिग्री प्रदान करने वाले केंद्र बन गए।

इसमें कहा गया है कि ऐसे कई कॉलेजों के बंद होने से विश्वसनीय गुणवत्ता आश्वासन के अभाव में विस्तार से जुड़े दीर्घकालिक जोखिमों पर प्रकाश पड़ता है।

भाषा संतोष नेत्रपाल

नेत्रपाल


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