सत्य निकेतन हादसे में बेटा खोने वाले पिता ने कहा, अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली न भेजें

सत्य निकेतन हादसे में बेटा खोने वाले पिता ने कहा, अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली न भेजें

सत्य निकेतन हादसे में बेटा खोने वाले पिता ने कहा, अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली न भेजें
Modified Date: September 8, 2026 / 03:32 pm IST
Published Date: September 8, 2026 3:32 pm IST

देवास, आठ सितंबर (भाषा) “अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली न भेजें…” राष्ट्रीय राजधानी के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना में अपने 21 वर्षीय बेटे अर्पित जाज को खोने के बाद उसे अंतिम विदाई देने वाले देवास के भूपेंद्र जाज ने मंगलवार को दोनों हाथ जोड़कर अभिभावकों से यह भावुक अपील की।

भूपेंद्र की आवाज में नौजवान बेटे को खोने का दर्द और दूसरे परिवारों को ऐसी त्रासदी से बचाने की चिंता साफ झलक रही थी। दिल्ली के एक महाविद्यालय के बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र अर्पित की अंतिम यात्रा में उनके परिजन के साथ ही दोस्तों, शिक्षकों और पड़ोसियों की आंखें नम थीं।

बेटे को अंतिम विदाई देने के बाद भूपेंद्र ने संवाददाताओं से कहा, “मैं सभी माता-पिता से बस यही कहना चाहूंगा कि वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली न भेजें। मैं हताश हो गया हूं। मैं कई कठिनाइयों से जूझते हुए अर्पित को पढ़ा रहा था।”

उन्होंने बताया कि अर्पित की एक आंख हादसे में खराब हो गई थी और परिवार ने उसकी दूसरी आंख दान करने का फैसला किया है, ताकि किसी जरूरतमंद मरीज की जिंदगी रोशन हो सके।

देवास में टैक्सी के कारोबार से जुड़े भूपेंद्र ने कहा कि हादसे के बाद बेटे की तलाश में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और दिल्ली के प्रशासन से उन्हें जरूरी मदद नहीं मिली।

उन्होंने कहा, “हम दुर्घटनास्थल से लेकर अस्पतालों तक अर्पित को ढूंढते रहे, लेकिन कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं था। आखिरकार एक वकील की मदद से हमने बेटे के शव की पहचान की।”

भूपेंद्र ने मांग की कि हादसे की विस्तृत जांच कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और प्रशासन को घटनास्थल के आसपास की जर्जर इमारतों पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

अर्पित के दादा माखनलाल जाज ने रुंधे गले से कहा, “वह (अर्पित) हमारे परिवार का चिराग था। हमसे हमारा सहारा छिन गया।”

परिजन के मुताबिक, रक्षाबंधन और जन्माष्टमी का त्योहार मनाने के बाद अर्पित पांच सितंबर को गृहनगर देवास से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे और छह सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे थे।

उन्होंने बताया कि इसके कुछ ही घंटों बाद सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना हुई, जिसमें अर्पित की मौत हो गई।

परिजन के अनुसार, हादसे के बाद उनका अर्पित से संपर्क टूट गया। उन्होंने बताया कि सात सितंबर को अर्पित के शव की शिनाख्त हुई, जिसके बाद उसे अंतिम संस्कार के लिए देवास ले आया गया।

भाषा

हर्ष पारुल

पारुल


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