डीयू ने आंकड़े जारी कर प्रवेश में जातिगत भेदभाव के राहुल गांधी के आरोपों का खंडन किया
डीयू ने आंकड़े जारी कर प्रवेश में जातिगत भेदभाव के राहुल गांधी के आरोपों का खंडन किया
नयी दिल्ली, 15 मार्च (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने प्रवेश प्रक्रिया में जातिगत भेदभाव के राहुल गांधी के आरोपों का पुरजोर तरीके से खंडन करते हुए रविवार को सीयूईटी के माध्यम से शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में छात्रों के नामांकन के आंकड़े जारी किए और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष से ‘‘अपुष्ट’’ बयान देने से परहेज करने की अपील की।
डीयू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘दिल्ली विश्वविद्यालय भारत के संविधान की सच्ची भावना के अनुरूप अपने सभी वैधानिक दायित्वों का पालन करता है, जैसा कि हमारी पारदर्शी प्रवेश और भर्ती प्रक्रियाओं में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।’’
विश्वविद्यालय द्वारा सामान्य विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीईयूटी)के आधार पर शैक्षणिक सत्र 2025-26 में प्रवेश पाने वाले स्नातकोत्तर छात्रों का आंकड़ा साझा किया, जिसके मुताबिक 4022 (38.59 प्रतिशत) अनारक्षित, 3115 (29.88 प्रतिशत) ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) , 1488(14.27 प्रतिशत) अनुसूचित जाति , 614 (5.89 प्रतिशत) अनुसूचित जनजाति और 1203 (11.54 प्रतिशत) आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) छात्र शामिल थे। प्रवेश पाने वाले स्नातकोत्तर छात्रों की कुल संख्या 10,422 थी।
डीयू के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्नातक पाठ्यक्रमों में 32,777 (46.56 प्रतिशत) छात्र अनारक्षित श्रेणी के अंतर्गत, 17,971 (25.52 प्रतिशत) छात्र अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत, 10,517 (14.93 प्रतिशत) छात्र अनुसूचित जाति के अंतर्गत, और क्रमशः 3,251 (4.62 प्रतिशत) एवं 5879 (8.35 प्रतिशत) छात्र अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) के अंतर्गत नामांकित हुए। स्नातक कार्यक्रमों में नामांकित छात्रों की कुल संख्या 70,395 रही।
विश्वविद्यालय ने अपने पोस्ट में कहा, ‘‘हम नेता प्रतिपक्ष से निराधार बयान देने से बचने की अपील करते हैं। इस तरह की टिप्पणियां विश्वविद्यालय में स्वस्थ शिक्षण वातावरण को कमजोर करती हैं।’’
गांधी ने संबंधित टिप्पणी शुक्रवार को लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए की थी।
उन्होंने कहा था, ‘‘मैं दिल्ली विश्वविद्यालय गया था। साक्षात्कार छात्रों को प्रवेश नहीं देने का एक तरीका मात्र है। वे आपकी जाति पूछते हैं, और फिर आप साक्षात्कार में असफल हो जाते हैं।’’
भाषा धीरज नेत्रपाल
नेत्रपाल

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