ई20 नीति की तत्काल समीक्षा हो और जनता को बिना इथेनॉल वाला विकल्प मिले: कांग्रेस

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ई20 नीति की तत्काल समीक्षा हो और जनता को बिना इथेनॉल वाला विकल्प मिले: कांग्रेस

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  • Publish Date - August 21, 2026 / 09:59 AM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 09:59 AM IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) कांग्रेस ने शुक्रवार को केंद्र की ई20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति की तत्काल समीक्षा करने तथा उपभोक्ताओं को बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग की और आरोप लगाया कि सरकार की इस नीति के कारण जनता को ‘‘महंगे खाने और महंगे सफर’’ दोनों की कीमत चुकानी पड़ रही है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ‘‘गाड़ी भी महंगी पड़े और रसोई भी, ऐसी जनविरोधी ईंधन नीति देश को स्वीकार्य नहीं हो सकती।’’

रमेश ने दावा किया कि एथेनॉल उत्पादन में गन्ने और अनाज के इस्तेमाल के कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि करीब 25 लाख टन चीनी-लायक गन्ना एथेनॉल उत्पादन में चला गया, जिसके परिणामस्वरूप पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत 48 रुपये से बढ़कर 67 रुपये प्रति किलोग्राम और गुड़ की कीमत 50 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।

उन्होंने दावा किया कि चावल और मक्के का आटा भी क्रमश: 16 प्रतिशत और 11 प्रतिशत महंगा हुआ है, जबकि पशु आहार की कीमत में 10.34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

कांग्रेस महासचिव ने ई20 के कारण वाहनों के माइलेज और उनकी अनुकूलता को लेकर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा, ‘जो वाहन 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के लिए तैयार नहीं हैं, उनमें खराबी का जोखिम हो सकता है और बिना समुचित परीक्षण के वाहनों में माइलेज कम होने की आशंका है।’

रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने एथेनॉल उत्पादकों को लाभ पहुंचाने के लिए पेट्रोल के विकल्प सीमित कर दिए हैं, जबकि ई20 को लेकर वाहन मालिकों के बीच माइलेज और अनुकूलता संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं।

उन्होंने यह सवाल भी किया कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में कमी और पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाए जाने से लागत में आने वाली कमी के बावजूद पेट्रोल की कीमतों में कमी क्यों नहीं की गई?

रमेश ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार ई20 नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठा रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस कार्य समिति ने 19 अगस्त को ई20 के कारण कम माइलेज, वाहनों की अनुकूलता, उपभोक्ताओं के सीमित विकल्प और पर्यावरणीय क्षति से जुड़े सवालों पर भी चिंता जताई थी।

उन्होंने कहा, ‘हमारी मांग है कि ई20 नीति की तत्काल समीक्षा होनी चाहिए और जनता को बिना इथेनॉल वाले विकल्प मिलने चाहिए। गाड़ी भी महंगी पड़े और रसोई भी, ऐसी जनविरोधी ईंधन नीति देश को स्वीकार्य नहीं हो सकती।’

भाषा हक रंजन

रंजन