निर्वाचन आयोग सुनिश्चित करे कि असम में विशेष पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म-7 का दुरुपयोग न हो : विपक्ष

निर्वाचन आयोग सुनिश्चित करे कि असम में विशेष पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म-7 का दुरुपयोग न हो : विपक्ष

निर्वाचन आयोग सुनिश्चित करे कि असम में विशेष पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म-7 का दुरुपयोग न हो : विपक्ष
Modified Date: January 23, 2026 / 10:54 pm IST
Published Date: January 23, 2026 10:54 pm IST

गुवाहाटी, 23 जनवरी (भाषा) असम में विपक्षी दलों ने शुक्रवार को निर्वाचन आयोग से आह्वान किया कि राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआर) के दौरान किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से न हटाया जाए।

उन्होंने साथ ही आरोप लगाया कि ‘भाजपा के एजेंट’ फॉर्म-7 का दुरुपयोग करके वास्तविक नागरिकों को परेशान कर रहे हैं।

विपक्षी दलों ने समीक्षाधीन सत्र के दौरान दायर किए गए दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए दो फरवरी की समय सीमा को नाकाफी बताते हुए आयोग से इसे बढ़ाने का आग्रह किया।

वामपंथी दलों (मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी लेनिनवादी लिबरेशन, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और एसयूसीआई (सी) ने एक संयुक्त बयान में आरोप लगाया है कि अल्पसंख्यक समुदाय के पात्र मतदाताओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज करने के लिए फॉर्म-7 का दुरुपयोग किया जा रहा है।

फॉर्म-7 का उपयोग करके, कोई व्यक्ति तीन कारणों में से किसी एक के लिए अपना नाम हटाने का अनुरोध कर सकता है। इन कारणों में स्थायी रूप से स्थानांतरित हो जाना, पहले से नामांकित होना या भारतीय नागरिक न होना शामिल है।

इसी प्रकार, उस निर्वाचन क्षेत्र का कोई भी मतदाता पांच कारणों में से किसी एक के आधार पर अन्य मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन कर सकता है। इन कारणों में मृत्यु, कम आयु, अनुपस्थिति/स्थायी रूप से स्थानांतरित, पहले से पंजीकृत, या भारतीय नागरिक न होना शामिल है। हालांकि, नाम हटाने से पहले, अधिकारियों द्वारा फॉर्म-7 के आवेदनों पर सुनवाई की जाती है।

वामपंथी दलों ने दावा किया कि फॉर्म-7 के माध्यम से सैकड़ों मतदाताओं के खिलाफ एक ही शिकायतकर्ता के नाम का उपयोग करके शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनमें से कई मामलों में जिस व्यक्ति के नाम का उपयोग किया गया था उसने पूरी तरह से अनभिज्ञता जताई है।

संयुक्त बयान में कहा गया, ‘‘जीवित लोगों के नाम भी ‘मृत’ बताकर हटाने की कोशिश की गई है। मुख्य रूप से, इस तरह के आवेदन धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ दर्ज किये गए हैं।’’

इसके मुताबिक, ‘‘कई बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता उन पर अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए दबाव डाल रहे हैं।’’

वामपंथी दलों ने यह भी दावा किया कि जिन व्यक्तियों के खिलाफ शिकायतें दर्ज की गई हैं, उन्हें बहुत कम समय के नोटिस पर अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए कहा जा रहा है और नामित कार्यालयों में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की सुनवाई करने के लिए बुनियादी ढांचा मौजूद नहीं है।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद सुष्मिता देव ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में इसी तरह की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नामों को हटाने के लिए फॉर्म-7 की आपत्तियां बड़ी संख्या में जमा की जा रही हैं, जिनमें से लगभग सभी मामलों में शिकायतकर्ता का पता नहीं चल पा रहा है या वह अनभिज्ञता जता रहा है।

देव ने असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट से आंकड़े उद्धृत करते हुए कहा कि सिलचर विधानसभा क्षेत्र के तहत 15,304 आपत्तियां, बरखेत्री में 10,249, हाजो-सुअलकुची में 10,151, कटिगोड़ा में 9,671 और मंगलदाई में 8,602 आपत्तियां प्राप्त हुई हैं।

भाषा धीरज रवि कांत


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