आर्थिक स्थिरता कोष की सत्ता पक्ष ने सराहना की, विपक्ष ने एलपीजी संकट के लिए सरकार को घेरा

आर्थिक स्थिरता कोष की सत्ता पक्ष ने सराहना की, विपक्ष ने एलपीजी संकट के लिए सरकार को घेरा

आर्थिक स्थिरता कोष की सत्ता पक्ष ने सराहना की, विपक्ष ने एलपीजी संकट के लिए सरकार को घेरा
Modified Date: March 16, 2026 / 05:40 pm IST
Published Date: March 16, 2026 5:40 pm IST

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर देश में प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए आर्थिक स्थिरता कोष की स्थापना किए जाने को एक सराहनीय कदम बताते हुए शिवसेना ने कहा कि कोविड की तरह ही इस संकट का भी उपयोग अवसर के तौर पर किया जा सकता है। वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए जिसकी वजह से देश में एलपीजी संकट उत्पन्न हुआ।

उच्च सदन में अनुदान की अनुपूरक मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना के मिलिंद मुरली देवरा ने कहा कि पश्चिम एशिया में हो रहे संघर्ष का असर दुनिया के विभिन्न देशों के साथ साथ भारत पर भी पड़ रहा है लेकिन कोविड की तरह ही हम इस संकट का भी उपयोग अवसर के तौर पर कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिरता कोष (इकॉनामिक स्टैबिलाइजेशन फंड) की स्थापना बेहद ही सराहनीय कदम है। ‘‘लेकिन एक कदम और आगे जाना होगा। आज भी कई मंत्रालयों में पूरा आवंटित धन उपयोग नहीं हो पाता। इसका दूसरा पक्ष यह है कि अगर हम पांच से दस फीसदी आवंटित राशि बचा सकें तो बड़ी बचत की जा सकती है। और इसके लिए उपभोक्ताओं पर भी कोई बोझ नहीं पड़ेगा।’’

उन्होंने सुझाव दिया कि पश्चिम एशिया में हो रहे संघर्ष से निपटने के लिए हमें गैस उत्पादन में निवेश बढ़ाना होगा। साथ ही बायो सीएनजी पर भी निवेश बढ़ाना होगा जिससे हमारी आयातित सीएनजी पर निर्भरता घटेगी।

शिव सेना सदस्य ने कहा ‘‘साथ ही हमें घरेलू तेल भंडारों पर निवेश बढ़ाना होगा। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि शक्ति संतुलन बीते करीब 80 साल से एशिया की ओर हो रहा है और एशिया में भारत एक बड़ी ताकत है।’’

भाजपा के संजय सेठ ने कहा कि आज भारत जिस आर्थिक मजबूती से खड़ा है वह बीते करीब बारह वर्षों में की गई मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ईरान और इजराइल अमेरिका युद्ध तथा यूक्रेन रूस युद्ध के कारण तेल और गैस के कारखाने बंद हो रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विदेश नीति के कारण भारत में घबराहट की स्थिति नहीं है बल्कि हमारे दो जहाज ईरान के होर्मुज से गैस लेकर आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ये जहाज दो तीन दिन में भारत आ जाएंगे और देश में गैस की कमी दूर हो जाएगी। ‘‘लेकिन विपक्ष संकट के इस समय में राजनीति कर रहा है जबकि उन्हें सरकार के साथ खड़े होना चाहिए। इन्हीं वैश्विक संकट से निपटने के लिए 57 हजार 381 करोड़ रुपये की धनराशि से आर्थिक स्थिरता कोष बनाया गया है।’’

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने जानना चाहा कि देश में गैस सिलेंडर की किल्लत कैसे हो गई?

उन्होंने कहा ‘‘लोगों को पता नहीं था लेकिन प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री को इस संकट का पता था। प्रधानमंत्री जानते थे कि होर्मुज मार्ग का बड़ा हिस्सा ईरान के कब्जे में है फिर ईरान से तनातनी की जरूरत क्या थी?’’

उन्होंने इस संकट के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि ईरान भारत का परंपरागत मित्र है।

सिंह के अनुसार, ईरान दौरे पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत और ईरान के संबंध सदियों पुराने हैं। ‘‘चाबहार बंदरगाह पर भारत ने अरबों रुपये लगाए। फिर भी वहां के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर, वहां के स्कूलों में बमबारी में बच्चों की मौत पर, और नौसेना अभ्यास के बाद भारत से वापस जा रहे ईरानी पोत पर हमले में 80 से अधिक ईरानियों की मौत पर भारत सरकार ने एक शब्द भी नहीं कहा।’’

उन्होंने कहा कि होर्मुज मार्ग खुल जाने की जानकारी सही नहीं है क्योंकि केवल दो पोत वहां से आए हैं, 22 पोत अब तक वहीं फंसे हुए हैं।

बीजू जनता दल के निरंजन बिशी ने कहा कि विकास की बड़ी बड़ी बातें की जाती हैं लेकिन अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय के लोगों की समस्याएं आज भी दूर नहीं हो पाई हैं और वे विकास की दौड़ में पीछे हैं।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के एस निरंजन रेड्डी ने कहा कि देश में अनाज का भंडार बफर स्टॉक से कहीं ज्यादा है फिर भी देश में कई लोग अनाज से वंचित क्यों हैं? उन्होंने मांग की इस अतिरिक्त अनाज के भंडारण की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए।

भाकपा के संदोष कुमार पी ने कहा कि सरकार को पश्चिम एशिया में जारी संकट से देश को बचाने के लिए समुचित कदम उठाने चाहिए और एक दूसरे पर दोष मढ़ने से कुछ नहीं होगा।

भाजपा के डॉ सिकंदर कुमार ने कहा कि चालू खाते का घाटा लगातार कम हो रहा है और यह वित्तीय अनुशासन महत्वपूर्ण है।

आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल ने कहा कि राज्यों को राशि आवंटित होती है लेकिन आपात स्थिति में एंबुलेन्स सेवा उपलब्ध नहीं होती। गांवों में आज भी चारपाई पर मरीज को डाल कर ले जाया जाता है।

उन्होंने कहा कि एंबुलेन्स का किराया भी भारी भरकम है। एंबुलेन्स के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल ऐप बनाया जाना चाहिए।

बीजू जनता दल की सुलता देव ने कहा कि सरकार ने दस साल से लोगों को लाइन में खड़ा कर रखा है। ‘‘नोटबंदी में पैसों के लिए लाइन में खड़े हुए और आज गैस सिलेंडर के लिए हम लाइन में खड़े हैं।’’

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की डॉ फौजिया खान ने कहा कि क्या वर्तमान में जारी पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए अनुपूरक मांगों में विचार किया गया है ?

उन्होंने कहा ‘‘जो देश बरसों से हमारा मित्र रहा है उसके सर्वोच्च नेता को ही नहीं मारा गया बल्कि 245 बच्चियों तक को मार दिया गया। फिर भी न जाने किस देश के दबाव में हमने मौन साधे रखा। ’’

चर्चा में भाजपा के रामभाई मोकारिया और घनश्याम तिवाड़ी ने भी हिस्सा लिया। चर्चा अधूरी रही।

भाषा मनीषा माधव

माधव


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