खुद को पीएमओ अधिकारी बता कर लोगों से ठगी करने के आरोपी संपादक की जमानत याचिका खारिज

खुद को पीएमओ अधिकारी बता कर लोगों से ठगी करने के आरोपी संपादक की जमानत याचिका खारिज

खुद को पीएमओ अधिकारी बता कर लोगों से ठगी करने के आरोपी संपादक की जमानत याचिका खारिज
Modified Date: July 13, 2026 / 09:11 pm IST
Published Date: July 13, 2026 9:11 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने जम्मू से प्रकाशित होने वाले एक समाचार पत्र के संस्थापक-संपादक विजय गुप्ता की जमानत याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित तौर पर खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का एक ‘‘प्रभावशाली’’ अधिकारी बताते हुए लोगों से उनके काम कराने के नाम पर चार करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने के आरोप में गुप्ता को मई में गिरफ्तार किया था।

अदालत ने कहा कि विजय गुप्ता धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 के तहत निर्धारित दो शर्तों को पूरा करने में विफल रहे हैं, इसलिए उनकी जमानत याचिका खारिज की जाती है।

इन शर्तों के अनुसार, अदालत को इस बात से सहमत होना चाहिए आरोपी के अपराध का दोषी न होने के उचित आधार हैं और जमानत पर रिहा होने के बाद उसके फिर से कोई अपराध करने की आशंका नहीं है।

‘यंग बाइट्स’ के संस्थापक एवं संपादक विजय गुप्ता को ईडी ने 20 मई को दिल्ली पुलिस की प्राथमिकी के आधार पर दर्ज धन शोधन के मामले में गिरफ्तार किया था।

ईडी और दिल्ली पुलिस के अनुसार, गुप्ता ने खुद को पीएमओ में कार्यरत अधिकारी बताकर लोगों से ठगी की। इनमें उनका एक स्कूली मित्र और एक दुकानदार भी शामिल है।

प्राथमिकी में कहा गया है कि गुप्ता ने वर्ष 2016 से 2026 के बीच 26 विदेश यात्राएं कीं। इनमें से कई यात्राएं प्रधानमंत्री के विदेश दौरों के दौरान हुईं, ताकि वह खुद को सरकार के एक उच्च पदस्थ और प्रभावशाली अधिकारी के रूप में प्रदर्शित कर सके।

प्राथमिकी के अनुसार, उन्होंने अपनी इस झूठी छवि को विश्वसनीय बनाने के लिए वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ अपनी तस्वीरें भी प्रसारित कीं।

पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने अपने आदेश में कहा, ‘‘इस अदालत का मानना है कि आरोपी ने फर्जी पहचान, विदेश यात्राओं और सरकारी अधिकारियों के साथ तस्वीरों का इस्तेमाल कर खुद को पीएमओ का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए पीड़ितों से अवैध आर्थिक लाभ प्राप्त किए।’’

अदालत ने कहा, ‘‘आरोपी पीएमएलए की धारा 45 के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा करने में विफल रहा है। इसलिए उसे नियमित जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।’’

न्यायाधीश ने 18 पृष्ठों के आदेश में यह भी कहा कि यदि आरोपी को नियमित जमानत दी जाती है तो उसके साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने, गवाहों को प्रभावित या धमकाने तथा इसी प्रकार का कोई और अपराध करने की प्रबल संभावना है।

आदेश में कहा गया, ‘‘इसलिए आरोपी विजय गुप्ता की जमानत याचिका खारिज की जाती है।’’

इससे पहले, जमानत याचिका का विरोध करते हुए ईडी ने दलील दी कि वर्ष 2016 से 2026 के बीच गुप्ता ने अपने बैंक खातों में 4.06 करोड़ रुपये नकद जमा किए, जो धन शोधन कानून के तहत अपराध से अर्जित आय है।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि गुप्ता ने अपने आयकर रिटर्न (आईटीआर) में इस नकद राशि का कहीं भी उल्लेख नहीं किया था।

गुप्ता की इस दलील को भी अदालत ने खारिज कर दिया कि उन्हें हृदय की गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के कारण जमानत दी जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि वह जेल में दवाइयों का सेवन कर रहे हैं, लेकिन उनके स्वास्थ्य की स्थिति स्थिर है।

गुप्ता को 20 मई को गिरफ्तार किया गया था और ईडी की ओर से इस मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जाना अभी बाकी है।

भाषा सुभाष प्रशांत

प्रशांत


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