लोगों को धार्मिक और भाषाई आधार पर बांटने के प्रयास किए जा रहे हैं: भगवत
लोगों को धार्मिक और भाषाई आधार पर बांटने के प्रयास किए जा रहे हैं: भगवत
(तस्वीरों के साथ)
अगरतला, 21 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भगवत ने मंगलवार को आरोप लगाया कि लोगों को धार्मिक और भाषाई आधार पर विभाजित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति इसकी ‘विविधता में एकता’ में निहित है।
अगरतला से लगभग 23 किलोमीटर दूर फकरीमुरा में मां चिन्मयी सौंदर्य मंदिर में अभिषेक समारोह के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए भगवत ने कहा कि कुछ ‘बुरी ताकतें’ इस बात से चिंतित हैं कि यदि भारत अपनी सदियों पुरानी सभ्यतागत शक्ति के बल पर प्रगति करेगा तो उनकी ‘दुकानें’ बंद हो जाएंगी।
उन्होंने कहा, ‘‘वे धर्मों और भाषाओं के आधार पर लोगों के बीच कलह पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे उदाहरण देने की आवश्यकता नहीं है।’’
त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्रसेन रेड्डी, तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा और मुख्यमंत्री माणिक साहा भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।
उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि विविधता लंबे समय से भारत की पहचान रही है और कहा कि अनेक भाषाओं, धर्मों, परंपराओं और संस्कृतियों के बावजूद देश ने सदियों से प्रगति की है।
उन्होंने कहा, ‘‘जिन देशों का इतिहास 4,000 या 5,000 वर्ष से अधिक पुराना नहीं है, उनमें एक धर्म और एक भाषा हो सकती है, लेकिन भारत बिल्कुल अलग है, जिसका लंबा इतिहास, परंपरा और संस्कृति है।’’ उन्होंने लोगों से एकजुट रहने और फूट डालने के प्रयासों को विफल करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “चाहे कोई भी स्थिति उत्पन्न हो जाए, भय के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।”
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि वर्तमान विश्व व्यवस्था में, शक्ति अक्सर सत्य को ढक लेती है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि आपके पास शक्ति है, तो आपकी सामर्थ्य सिद्ध हो जाएगा, और कोई इस बात पर ध्यान नहीं देगा कि आप सही मार्ग पर हैं या नहीं। इसलिए, ज्ञान और शक्ति दोनों अर्जित करें।’’
भागवत ने कहा कि मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं हैं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से सामाजिक जीवन और ज्ञानोदय के केंद्र रहे हैं।
भाषा संतोष माधव
माधव

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