देशभर में हर्षोल्लास से मनायी गयी ईद, कई जगह लोगों ने पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर किया प्रदर्शन

देशभर में हर्षोल्लास से मनायी गयी ईद, कई जगह लोगों ने पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर किया प्रदर्शन

देशभर में हर्षोल्लास से मनायी गयी ईद, कई जगह लोगों ने पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर किया प्रदर्शन
Modified Date: March 21, 2026 / 09:02 pm IST
Published Date: March 21, 2026 9:02 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) देशभर में शनिवार को ईद उल-फितर का त्योहार हर्षोल्लास से मनाया गया तथा मस्जिदों एवं ईदगाहों में बड़ी संख्या में लोगों ने शांति, प्रगति और भाईचारे के लिए विशेष प्रार्थनाएं कीं।

देश के कई हिस्सों में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन भी हुए, जिनमें ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों की निंदा की गई और पश्चिम एशिया में शत्रुता को तत्काल समाप्त करने की मांग की गई।

पुरानी दिल्ली की व्यस्त गलियों से लेकर जम्मू-कश्मीर के ईदगाहों और कोलकाता की चहल-पहल वाली नखोदा मस्जिद तक, लाखों श्रद्धालु इस त्योहार पर अच्छे परिधानों में सज-धज कर एक-दूसरे को गले लगाते एवं ‘सेवैयां’ का आदान-प्रदान करते नजर आए।

मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘ईद-उल-फितर की शुभकामनाएं। यह दिन चारों ओर भाईचारे एवं दयालुता को और बढ़ाए। सभी लोग खुश और स्वस्थ रहें। ईद मुबारक।’’

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और अन्य प्रमुख नेताओं ने भी लोगों को ईद की शुभकामनाएं दीं और ईद के उत्सव में भाग लिया।

दिल्ली में, लोग मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए उमड़े। शहर के कई हिस्सों में कोहरे की चादर छाई हुई थी।

नमाज अदा करने के बाद लोगों ने एक दूसरे को मुबारकबाद दी। जामा मस्जिद, फतेहपुरी मस्जिद और सीलमपुर, ओखला और निजामुद्दीन की मस्जिदों में भारी भीड़ देखी गई।

हालांकि, पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर में उत्सव का माहौल फीका रहा, क्योंकि होली के दिन हुई झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया था।

चार मार्च को यहां हस्तसाल गांव में यह घटना घटी थी। हस्तसाल गांव में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई थी। प्रमुख प्रवेश और निकास बिंदुओं पर बैरिकेड लगाए गए थे और बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी।

हस्तसाल गांव में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद निवासियों ने बताया कि उन्होंने शांतिपूर्वक प्रार्थना की।

जम्मू-कश्मीर में उत्साह के साथ ईद में मनाई गई। सबसे ज्यादा भीड़ श्रीनगर में डल झील के किनारे स्थित हजरतबल दरगाह और जम्मू में रेजिडेंसी रोड पर स्थित ईदगाह में जुटी।

हालांकि, प्रशासन ने लगातार सातवें वर्ष श्रीनगर के पुराने शहर क्षेत्र में नौहट्टा स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद में ईद की नमाज की अनुमति नहीं दी।

इस घटनाक्रम को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “एक तरफ तो वे कहते हैं कि सब कुछ सामान्य है। दूसरी तरफ वे ऐतिहासिक मस्जिद को बंद कर देते हैं। यह किस तरह की सामान्य स्थिति है? मुझे उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे फैसले बदलेंगे।”

उमर अब्दुल्ला ने अपने पिता फारूक अब्दुल्ला के साथ हजरतबल मस्जिद में नमाज अदा की ।

उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा दुनिया पर थोपा गया ‘अवैध’ युद्ध जल्द से जल्द समाप्त होना चाहिए।

ईद की नमाज के बाद अमेरिका विरोधी और इजराइल विरोधी प्रदर्शनों की आशंका से घाटी के संवेदनशील इलाकों में अधिकारियों ने सुरक्षा कड़ी कर दी थी। कश्मीर के कई हिस्सों में लोगों ने ईरान पर हुए हमलों की निंदा करते हुए और पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करने की मांग करते हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किए।

उत्तर प्रदेश के ईदगाहों, मस्जिदों और दरगाहों पर मुसलमान ईद की नमाज अदा करने और एक-दूसरे को बधाई देने के लिए एकत्र हुए।

राज्य की राजधानी लखनऊ में, मुख्य कार्यक्रम ऐशबाग ईदगाह में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और भाजपा के राज्यसभा सदस्य दिनेश शर्मा समेत कई राजनीतिक नेताओं ने ईदगाह का दौरा किया और लोगों को अपनी शुभकामनाएं दीं।

सम्भल, कौशांबी, देवरिया और अमेठी में कड़ी सुरक्षा के बीच ईद का त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया। कुछ श्रद्धालु ईरान पर हुए हमलों के विरोध में काली पट्टी बांधकर नमाज अदा करते नजर आए।

राजस्थान के जयपुर में महिलाओं और बच्चों ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारे लगाते हुए एवं ईरान में हुई मौतों पर शोक व्यक्त करते हुए जुलूस निकाला। सीकर और अजमेर में भी इसी तरह का प्रदर्शन किया गया।

प्रदर्शनों के बावजूद राजस्थान में शांतिपूर्वक ईद का त्योहार मनाया गया।

मध्यप्रदेश में भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए, जहां शिया समुदाय के कई लोगों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या की निंदा करते हुए ईद नहीं मनाई।

हालांकि, सुन्नी समुदाय के सदस्य राज्य भर के ईदगाहों में भारी संख्या में उमड़े और उत्साह के साथ ईद मनाई।

बंगाल में इस वर्ष ईद का राजनीतिक महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि अगले महीने राज्य में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

राज्य की राजधानी कोलकाता में रेड रोड पर होने वाला वार्षिक धार्मिक आयोजन – जो पूर्वी भारत के सबसे बड़े आयोजनों में से एक है – ने विभिन्न दलों को राज्य के विशाल मुस्लिम मतदाता वर्ग तक पहुंचने का अवसर प्रदान किया, जो राज्य की कुल आबादी का लगभग 30 प्रतिशत है।

रेड रोड पर नमाजियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के माध्यम से लोगों का ‘मताधिकार छीनने’ का प्रयास करने का आरोप लगाया।

ओडिशा में ईद मनाने के लिए मस्जिदों और ईदगाहों में श्रद्धालु उमड़ पड़े।

राज्यपाल हरि बाबू कम्भमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय को शुभकामनाएं दीं।

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में नमाजियों के बीच पहुंचे।

राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद जल्द ही पद छोड़ने वाले नीतीश कुमार इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। ऐतिहासिक गांधी मैदान में नमाजियों ने 44 वर्षीय निशांत का गर्मजोशी से स्वागत किया। निशांत दो हफ्ते पहले ही अपने पिता के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड में शामिल हुए थे।

दक्षिणी राज्यों में भी ईद मनाई गई, जहां तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में बड़ी संख्या में मुसलमान मस्जिदों और ईदगाहों में उमड़े।

हैदराबाद में, चारमीनार के पास स्थित ऐतिहासिक लाड बाजार हजारों लोगों की भीड़ से गुलजार हो उठा।

तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला और मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने ईद के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं।

आंध्र प्रदेश में राज्यपाल एस अब्दुल नजीर, मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और विपक्ष के नेता वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने लोगों को ईद की बधाई दी।

कर्नाटक में भी ईद का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया और हजारों लोगों ने मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा की।

बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों में लोग सुबह-सुबह बड़ी संख्या में मस्जिदों में नमाज़ अदा करने के लिए उमड़े, इसके बाद उन्होंने अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से मुलाकात की।

भाषा

राजकुमार पवनेश

पवनेश


लेखक के बारे में