नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) वैश्विक तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने पर भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश में बुजुर्ग आबादी पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इन चार देशों में करीब 1.5 अरब लोग, यानी दुनियाभर में प्रभावित होने वाली कुल आबादी का 73 प्रतिशत इस जोखिम के दायरे में आ सकते हैं।
‘द लांसेट प्लैनेटरी हेल्थ’ पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन में यह अनुमान लगाया गया है।
अध्ययन में पाया गया कि बुजुर्गों को पहले के अनुमानों की तुलना में कम तापमान पर भी गर्मी से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
स्टैनफोर्ड और पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी समेत विभिन्न संस्थानों के शोधकर्ताओं ने कहा कि दक्षिण एशिया और फारस की खाड़ी के क्षेत्र सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में हैं। वैश्विक तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक की वृद्धि होने पर इन क्षेत्रों में बुजुर्गों को लगातार करीब तीन महीने तक दिन-रात खतरनाक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार सबसे बड़ी चुनौती उन देशों के सामने होगी, जहां गर्मी का अत्यधिक जोखिम, गरीबी की ऊंची दर और ठंडक उपलब्ध कराने वाली सुविधाओं तक सीमित पहुंच है। इनमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमा और नाइजर शामिल हैं।
बुजुर्ग अधिक तापमान और आर्द्रता की स्थिति में अपने शरीर का तापमान नियंत्रित करने में कम सक्षम होते हैं। इसका कारण यह है कि उन्हें अपेक्षाकृत कम पसीना आता है, उनकी रक्त वाहिकाएं धीमी प्रतिक्रिया देती हैं और गर्मी में उनके हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि पिछले अध्ययनों में मुख्य रूप से स्वस्थ युवा वयस्कों पर किए गए परीक्षणों के आंकड़ों का इस्तेमाल यह अनुमान लगाने के लिए किया गया था कि किस तापमान और आर्द्रता पर गर्मी मानव शरीर के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने कहा कि पिछले अध्ययनों में अत्यधिक गर्मी से जोखिम वाले बुजुर्गों की संख्या कम से कम दोगुनी कम आंकी गई हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने अपने नए अध्ययन में अलग-अलग समूह बनाए, जिनमें तीन आयु वर्गों की गर्मी सहने की क्षमता अलग-अलग मापी गई थी – युवा वयस्क (15-39 वर्ष), मध्यम आयु वर्ग (40-59 वर्ष) और बुजुर्ग (60 वर्ष या उससे अधिक)।
इसके बाद शोधकर्ताओं ने अलग-अलग परिस्थितियों में यह पता लगाया कि प्रत्येक आयु वर्ग के लिए किस क्षेत्र में गर्मी खतरनाक स्तर तक पहुंच सकती है और कितने लोग इससे प्रभावित होंगे।
अध्ययन के लेखकों ने कहा, ‘‘भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश में कुल 1.48 अरब लोग गर्मी के जोखिम के दायरे में हैं, जो दुनियाभर में जोखिम वाली 2.03 अरब आबादी का 72.6 प्रतिशत है।’’
लेखकों ने लिखा, ‘‘बुजुर्गों को कहीं अधिक बार और बड़े क्षेत्र में ऐसी गर्मी का सामना करना पड़ता है, जिसे उनका शरीर पर्याप्त रूप से सहन या नियंत्रित नहीं कर सकता। वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की स्थिति में बुजुर्गों गर्मी से उतना जोखिम हो सकता है, जितना युवा वयस्कों को चार डिग्री सेल्सियस की वृद्धि पर होता है।’’
शोधकर्ताओं ने कहा कि असहनीय गर्मी से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या पहले के अनुमान से कहीं अधिक हो सकती है। इसका प्रभाव बड़े भौगोलिक क्षेत्रों में और पहले की अपेक्षा अधिक लंबी अवधि तक रहने की आशंका है।
भाषा गोला सुरभि
सुरभि