दिल्ली जिमखाना क्लब के कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर रोजगार सुरक्षा की गुहार लगाई
दिल्ली जिमखाना क्लब के कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर रोजगार सुरक्षा की गुहार लगाई
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) ‘दिल्ली जिमखाना वर्कर्स एसोसिएशन’ ने पट्टे से जुड़े विवाद के कारण परिसर से बेदखल किए जाने के खतरे के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से क्लब के करीब 700 कर्मचारियों की नौकरियां सुरक्षित करने की अपील की है।
एसोसिएशन ने बुधवार को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि क्लब के सभी 700 स्थायी और संविदा कर्मचारी मध्यम तथा निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों से आते हैं और बेदखली के नोटिस से उनमें भय और अनिश्चितता पैदा हो गई है।
उसने कहा कि कई कर्मचारी एक दशक से अधिक समय से क्लब में काम कर रहे हैं और अपनी आजीविका के लिए इस पर निर्भर हैं।
पत्र में कहा गया कि कई कर्मचारियों पर कर्ज और अन्य वित्तीय देनदारियां भी हैं।
एसोसिएशन ने कहा कि अनेक कर्मचारी अपने कामकाजी जीवन का बड़ा हिस्सा क्लब में बिता चुके हैं और उसके कामकाज में किसी भी तरह की रुकावट से उनके परिवार आर्थिक संकट में पड़ जाएंगे जिससे उनके बच्चों की पढ़ाई और कल्याण भी प्रभावित होगा।
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) ने 29 जून को दिल्ली जिमखाना क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि पट्टा समझौते के कथित उल्लंघन को लेकर लोक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत उसे परिसर से बेदखल करने का आदेश क्यों न दिया जाए।
यह नोटिस केंद्र सरकार द्वारा 26 मई को दिल्ली उच्च न्यायालय को यह बताए जाने के एक महीने से अधिक समय बाद जारी किया गया कि वह पांच जून तक क्लब के 27.3 एकड़ परिसर पर बलपूर्वक कब्जा नहीं लेगी।
केंद्र ने दलील दी है कि उसे ‘‘रक्षा अवसंरचना को मजबूत और सुरक्षित करने’’ के लिए इस भूमि की आवश्यकता है।
उच्च न्यायालय ने मामले को 28 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है, जबकि भूमि एवं विकास कार्यालय ने कारण बताओ नोटिस पर अंतिम फैसला लेने से पहले व्यक्तिगत सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख निर्धारित की है।
भाषा सिम्मी संतोष
संतोष

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