देश में रेलवे की 1,068 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण: अश्विनी वैष्णव

देश में रेलवे की 1,068 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण: अश्विनी वैष्णव

देश में रेलवे की 1,068 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण: अश्विनी वैष्णव
Modified Date: March 27, 2026 / 05:50 pm IST
Published Date: March 27, 2026 5:50 pm IST

नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा को बताया कि देशभर में भारतीय रेल की लगभग 1,068 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण है, जो कुल 4.99 लाख हेक्टेयर भूमि का करीब 0.21 प्रतिशत है।

उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए वैष्णव ने कहा कि रेलवे की कुल भूमि में से लगभग 80 प्रतिशत पटरियों के पास और 5 प्रतिशत उसके आसपास है तथा शेष 15 प्रतिशत भूमि स्टेशनों, कॉलोनियों, अस्पतालों तथा अन्य विकास कार्यों के लिए उपयोग में लाई जाती है।

उन्होंने कहा, “देश में रेलवे की लगभग 0.21 प्रतिशत भूमि पर अवैध अतिक्रमण है।”

मंत्री ने इसे गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि समय-समय पर कार्रवाई की जाती रही है, लेकिन हर बार मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाता है, क्योंकि रेलवे की भूमि पर झुग्गियां मुख्य रूप से गरीब लोगों द्वारा बसाई गई हैं। ‘‘जहां संभव होता है, वहां राज्य सरकारों के साथ मिलकर व्यावहारिक समाधान निकाला जाता है।’’

उन्होंने बताया कि रेलवे भूमि की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी कदम उठाए गए हैं, जिनमें भूमि का पूर्ण डिजिटलीकरण और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को पोर्टल पर उपलब्ध कराना शामिल है।

मंत्री ने कहा कि प्रत्येक भूखंड का उचित मानचित्रण कर उसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से सुरक्षित किया गया है और ड्रोन व सैटेलाइट के माध्यम से सर्वेक्षण भी किया गया है। ‘‘इससे नए अतिक्रमण को काफी हद तक रोकने में मदद मिली है।’’

उन्होंने सूरत का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से अतिक्रमणकारियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास देने का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए भूमि खाली कराई गई और विकास कार्य आगे बढ़ाया गया।

वैष्णव ने कहा कि जहां-जहां राज्यों का सहयोग मिलता है, वहां बेहतर परिणाम सामने आते हैं, क्योंकि भूमि राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आती है और केंद्र उनके साथ मिलकर काम करता है।

उन्होंने बताया कि रेलवे सैटेलाइट तकनीक और ड्रोन आधारित सर्वेक्षण का उपयोग कर रहा है, जिससे नए अतिक्रमण की पहचान कर तुरंत कार्रवाई संभव हो पाती है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में नए अतिक्रमण में काफी कमी आई है और यह लगभग रुक गया है, जबकि पुराना अतिक्रमण मुख्य चुनौती बना हुआ है।

मंत्री ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में लगभग 98.02 हेक्टेयर रेलवे भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है। उन्होंने कहा कि खाली पड़ी भूमि का उपयोग बुनियादी ढांचा विकास कार्यों के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जो भूमि तत्काल उपयोग में नहीं है, उसे व्यावसायिक उपयोग के लिए रेलवे भूमि विकास प्राधिकरण को सौंपा जाता है और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से विकास किया जा रहा है। ‘‘चालू वित्त वर्ष में इससे लगभग 900 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।’’

भाषा मनीषा अविनाश

अविनाश


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