पूर्व नौकरशाह ने डीयू छात्र पर रासुका लगाने को लेकर मेधा रूपम की आलोचना की

पूर्व नौकरशाह ने डीयू छात्र पर रासुका लगाने को लेकर मेधा रूपम की आलोचना की

पूर्व नौकरशाह ने डीयू छात्र पर रासुका लगाने को लेकर मेधा रूपम की आलोचना की
Modified Date: September 8, 2026 / 09:28 pm IST
Published Date: September 8, 2026 9:28 pm IST

नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी ने गौतम बुद्ध नगर जिले की जिलाधिकारी और उनके ही शिक्षण संस्थान सेंट स्टीफन्स से पढ़ीं मेधा रूपम की दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने का आदेश देने को लेकर आलोचना की है।

रासुका लगाए जाने के बाद छात्र को हिरासत में लिया गया था।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने छात्र को हिरासत में रखने के आदेश को रद्द करते हुए नौकरशाही के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है।

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से संबद्ध सेंट स्टीफंस कॉलेज के पूर्व छात्र समुदाय के सदस्य जोशी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ सेंट स्टीफन्स की छात्रा आकृति चौधरी को रासुका के तहत हिरासत में रखने का आदेश देने के मामले में गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी पूर्व सहपाठी मेधा रूपम की कड़ी निंदा करते हैं।’’

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लेख करते हुए जोशी ने कहा कि अदालत की यह चेतावनी कि ‘‘तानाशाह’’ अधिकारी उत्तर प्रदेश को एक ‘‘ऑर्वेलियन डिस्टोपिया’’ (एक ऐसी दमनकारी जगह जहां हर चीज पर नजर रखी जाती है) में बदल सकते हैं, यह बताती है कि यह कार्रवाई कितनी खतरनाक और असंवैधानिक थी।

जोशी ने कहा, ‘‘एहतियाती हिरासत का इस्तेमाल सुविधा या डराने-धमकाने के हथियार के तौर पर नहीं किया जा सकता। हम उचित कानूनी प्रक्रिया और संवैधानिक अधिकारों के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ हैं।’’

उन्होंने कहा कि सेंट स्टीफन्स कॉलेज के फेसबुक ग्रुप में लगभग 5,800 सदस्य हैं, और इस मुद्दे पर अपनी राय रखने वालों में इस समूह के सदस्य भी शामिल हैं।

जोशी की ये टिप्पणियां तब आईं, जब दो सितंबर को दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ द्वारा हिरासत में लिए जाने और आठ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ किए जाने के मामले में प्राथमिकी की हासिल करने के लिए उन्होंने स्वयं दिल्ली की एक अदालत का दरवाजा खटखटाया।

जोशी की अर्जी के मुताबिक वह पूर्वाह्न करीब 8.45 बजे नेहरू पार्क में से टहलकर लौट रहे थे, तभी विशेष प्रकोष्ठ के अधिकारी होने का दावा करने वाले दो लोग उनके पास आए और एक्स पर की गई उनकी एक पोस्ट के सिलसिले में पूछताछ के लिए उन्हें अपने साथ चलने को कहा।

जोशी का दावा है कि उन्हें कथित तौर पर बताया गया था कि उन्हें आरोपी बनाया गया है, लेकिन बार-बार अनुरोध करने के बावजूद प्राथमिकी की प्रति मुहैया नहीं कराई गई।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दो सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय की 24 वर्षीय छात्रा आकृति चौधरी की रासुका के तहत जारी निरूद्ध आदेश रद्द कर दिया और पीड़िता को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। यह रकम गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी और इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार दूसरे अधिकारियों के वेतन से वसूल की जाएगी।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने फैसले में कहा कि चौधरी को निरूद्ध रखने से संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है।

भाषा धीरज माधव

माधव


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