परीक्षा का तनाव कम करने की पहल: विद्यालयों में ‘आभार व्यक्त’ और ‘जादुई पिटारा’ जैसी पहल की शुरुआत
परीक्षा का तनाव कम करने की पहल: विद्यालयों में ‘आभार व्यक्त’ और ‘जादुई पिटारा’ जैसी पहल की शुरुआत
जयपुर, 22 फरवरी (भाषा) परीक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव और घबराहट को देखते हुए राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को मानसिक रूप से समर्थ बनाने के लिए ‘आभार व्यक्त’ सत्र और ‘जादुई पिटारा’ जैसी कई पहल की शुरुआत की है।
अधिकारियों ने बताया कि विभाग का लक्ष्य है कि प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में सहयोगात्मक, सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण तैयार किया जाए, ताकि विद्यार्थी न केवल पढ़ाई में अच्छे हों बल्कि मानसिक रूप से भी संतुलित और आत्मविश्वासी बनें।
अधिकारियों के अनुसार, शिक्षा निदेशालय बीकानेर द्वारा राजकीय विद्यालयों को इस दिशा में विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।
विद्यालयी शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि विद्यालयों में योग गतिविधियां, ‘आभार व्यक्त’ सत्र और ‘जादुई पिटारा’ जैसे नवाचारों के माध्यम से विद्यार्थियों को भावनात्मक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छह से 10 वर्ष के प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों को कहानियों, कविताओं और खेलों के जरिए सोचने और समझने की क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
कुणाल ने कहा कि विद्यार्थियों में ‘जादुई पिटारा’ के जरिए संज्ञानात्मक, भाषायी और सामाजिक विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कुणाल ने कहा कि ‘जादुई पिटारा’ एक खेल-आधारित शिक्षण सामग्री है, जिसमें खिलौने, कठपुतलियां, पहेलियां, पोस्टर और कहानियों के जरिए बच्चों की रुचि, पसंद-नापसंद, अति संवेदनशीलता आदि का आकलन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रार्थना सभा और बाल सभा में बच्चों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जा रहा है। इसी प्रकार 11 से 17 वर्ष के विद्यार्थियों में शिविर, प्रेरणादायी वीडियो और चित्रों के जरिए भावनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कुणाल ने कहा कि शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए विद्यालयों में कबड्डी, वॉलीबॉल और खो-खो जैसे पारंपरिक खेलों का सहारा लिया जा रहा है, ताकि सहयोग और अनुशासन की भावना मजबूत हो सके।
प्रार्थना सभा में अखबार पढ़ने और चिंतन जैसी गतिविधियां मानसिक संतुलन में मदद कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि विद्यालयों में स्थापित आईसीटी लैब और योग से तनाव प्रबंधन किया जा रहा है। इसके लिए स्मार्ट टीवी और लैब में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े वीडियो दिखाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चित्रकारी, संगीत और रचनात्मक गतिविधियों से विद्यार्थियों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने का मौका मिल रहा है।
विद्यार्थियों को तनाव से दूर रखने के लिए विद्यालयों में नियमित योग सत्र, ‘आभार व्यक्त’ गतिविधि जैसे दैनिक नवाचारों का आयोजन किया जा रहा है।
इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी भावनाएं साझा करने, सकारात्मक सोच विकसित करने और मानसिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित करना है।
‘आभार व्यक्त’ गतिविधि के अंतर्गत बच्चे नियमित रूप से ‘धन्यवाद’ और ‘माफ’ कीजिए जैसे शब्दों को अपने व्यवहार में उतारते हुए सहपाठियों, शिक्षकों और परिस्थितियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों में मानसिक बदलाव को पहचानते हुए उनसे संवाद स्थापित किया जा रहा है, ताकि समय रहते समन्वय और परामर्श के माध्यम से उनकी समस्याओं का समाधान किया जा सके।
शासन सचिव ने बताया कि इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव सामने आ रहा है और विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में परीक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हुआ है और भावनात्मक संतुलन में सुधार हुआ है तथा विद्यालय का वातावरण अधिक सौहार्दपूर्ण बना है।
कुणाल ने कहा, ‘‘परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, अंतिम लक्ष्य नहीं। इसके लिए शिक्षा विभाग द्वारा मानसिक स्वास्थ्य को लेकर किए जा रहे नवाचार विद्यार्थी के समग्र विकास की दिशा में एक सशक्त और संवेदनशील कदम हैं।’’
भाषा बाकोलिया संतोष
संतोष

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