पश्चिम बंगाल में अदालतों को बम से उड़ाने की फर्जी धमकी से न्यायिक कार्य बाधित, जांच शुरू

पश्चिम बंगाल में अदालतों को बम से उड़ाने की फर्जी धमकी से न्यायिक कार्य बाधित, जांच शुरू

पश्चिम बंगाल में अदालतों को बम से उड़ाने की फर्जी धमकी से न्यायिक कार्य बाधित, जांच शुरू
Modified Date: February 24, 2026 / 06:45 pm IST
Published Date: February 24, 2026 6:45 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

कोलकाता, 24 फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल में मंगलवार को कम से कम छह अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद संबंधित परिसरों में बड़े पैमाने पर निकासी और तलाशी अभियान चलाया गया, जिससे न्यायिक कामकाज बाधित हुआ।

हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि अदालत परिसरों की तलाशी के दौरान कोई भी संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। उन्होंने कहा कि फर्जी धमकी वाले ईमेल के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कोलकाता की सत्र अदालत और बैंकशाल स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल तथा दुर्गापुर में उप-संभागीय अदालतों और हुगली जिले के चुचुरा और आरामबाग स्थित न्यायालयों को मंगलवार सुबह ईमेल पर बम से उड़ाने की धमकी मिली।

उन्होंने बताया कि कोलकाता की सत्र अदालत और बैंकशाल स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय के परिसरों को खाली करा लिया गया, जिसके बाद कोलकाता पुलिस के बम निरोधक दस्ते के कर्मियों ने खोजी कुत्तों के साथ वहां गहन जांच की।

अधिकारी के अनुसार, राज्य की अन्य अदालतों के परिसरों में भी इसी तरह के कदम उठाए गए।

हालांकि, उन्होंने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान अदालत परिसरों में कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली।

यह पूछे जाने पर कि क्या अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी का न्यायिक अधिकारियों द्वारा किए जा रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) संबंधी कामकाज से कोई लेना-देना है, मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा कि जांच करना और दोषियों का पता लगाना राज्य पुलिस का काम है।

अग्रवाल ने कहा, “मुझे लगता है कि पुलिस पहले से ही बम धमकियों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इसका अदालतों में जारी किसी चुनाव संबंधी कार्यवाही से कोई संबंध है।”

घटना के बाद राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में जल्दबाजी में बुलाए गए एक संवाददाता सम्मेलन में मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने कहा कि धमकी भरे ईमेल के स्रोत का पता लगाने और यह निर्धारित करने के लिए जांच शुरू कर दी गई है कि इसमें कोई एक व्यक्ति शामिल है या फिर कोई समूह।

संवाददाता सम्मेलन में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पीयूष पांडे और कोलकाता के पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार भी चक्रवर्ती के साथ थे।

मुख्य सचिव ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार न्यायिक अधिकारियों और एसआईआर प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, “शहर (कोलकाता) की दो अदालतों में बम लगाए जाने की धमकी वाले अलग-अलग ईमेल मिले थे। चार अन्य अदालतों को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। सभी सुरक्षा उपाय किए गए और गहन जांच की गई। हालांकि, कुछ भी (संदिग्ध) नहीं मिला। तलाशी के बाद अदालतों में कामकाज फिर से शुरू हो गया।”

यह पूछे जाने पर कि क्या ईमेल की भाषा एक जैसी थी, क्या उसे समान शैली में लिखा गया था और क्या उसे भेजने वाला व्यक्ति एक ही था, चक्रवर्ती ने कहा, “हमारी जांच एजेंसियां ​​इन सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।”

उन्होंने बताया, “कोलकाता पुलिस का साइबर अपराध प्रकोष्ठ राज्य पुलिस और अन्य एजेंसियों के समन्वय से सर्वर और डोमेन का पता लगाने के काम में पहले ही जुट गया है।”

एसआईआर अभ्यास से जुड़े फर्जी कॉल के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्य सचिव ने कहा कि जांच के दौरान निश्चित तौर पर उस पहलू और अन्य पहलुओं पर भी गौर किया जाएगा।

आसनसोल की उप-संभागीय अदालत के उपसंभागीय न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा, “जैसे ही मुझे सचिवालय से उस ईमेल के बारे में सूचना मिली, जिसमें अदालत कक्ष के अंदर बम विस्फोट की धमकी दी गई थी, मैंने तुरंत कर्मचारियों और सभी को सतर्क किया और यह सुनिश्चित किया कि हम इमारत खाली कर दें। मैंने पुलिस को भी सूचित किया और वह जल्द ही मौके पर पहुंच गई।”

चुचुरा स्थित अदालत के एक वकील ने कहा, “मुझे पता चला कि एक ईमेल मिला है, जिसमें अदालत कक्ष में बम जैसी वस्तु होने की सूचना दी गई है। हमसे तुरंत परिसर खाली करने के लिए कहा गया।”

भाषा पारुल रंजन

रंजन


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