दिल्ली में ‘जनगणना’ के नाम पर फर्जी फॉर्म का खेल; अधिकारियों ने किया आगाह

दिल्ली में 'जनगणना' के नाम पर फर्जी फॉर्म का खेल; अधिकारियों ने किया आगाह

दिल्ली में ‘जनगणना’ के नाम पर फर्जी फॉर्म का खेल; अधिकारियों ने किया आगाह
Modified Date: May 21, 2026 / 03:51 pm IST
Published Date: May 21, 2026 3:51 pm IST

नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) दिल्ली के कुछ हिस्सों में जनगणना सर्वेक्षण दस्तावेज से मिलता-जुलता एक फर्जी फॉर्म बांटे जाने का मामला सामने आया है। जालसाजों के इस खेल पर वरिष्ठ जनगणना अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आगामी जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी और इसमें किसी भी तरह का कागजी काम शामिल नहीं है।

अधिकारियों के अनुसार, उत्तर-पूर्वी और पूर्वी दिल्ली के कुछ इलाकों में घरों में छपे हुए फॉर्म बांटे जाने की खबरें मिली हैं, जिनमें आवास की स्थिति, परिवार के सदस्यों, स्वामित्व की स्थिति, पीने के पानी, शौचालय, रसोई गैस/ईंधन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विवरण मांगा जा रहा है।

एक वरिष्ठ जनगणना अधिकारी ने इस फॉर्म को ‘फर्जी’ करार दिया और निवासियों को किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने के प्रति आगाह किया है।

अधिकारी ने कहा, ‘इस बार जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल है और डेटा एकत्र करने के लिए किसी भी कागजी फॉर्म का उपयोग नहीं किया जा रहा है। लोगों को ऐसे फॉर्म लेकर आने वाले किसी भी व्यक्ति को संवेदनशील जानकारी नहीं देनी चाहिए।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि गणना करने वाले और पर्यवेक्षक मुख्य रूप से मोबाइल फोन का उपयोग कर रहे हैं।

अधिकारी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जालसाज जनगणना प्रक्रिया की आड़ में व्यक्तिगत या घरेलू डेटा एकत्र करने का प्रयास कर सकते हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, कुछ इलाकों में बांटे जा रहे इस फॉर्म में मोबाइल फोन के मालिकाना हक, इंटरनेट पहुंच, वाहनों और आवास सुविधाओं सहित व्यापक सामाजिक-आर्थिक विवरण मांगने वाले कॉलम शामिल हैं।

अधिकारियों ने निवासियों को सलाह दी है कि वे जनगणना प्रक्रिया से जुड़े होने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति की पहचान की जांच करें और गणना प्रक्रिया के संबंध में केवल आधिकारिक सरकारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

एक अधिकारी ने कहा, ‘जनगणना प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के पास क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र हैं, जिन्हें स्कैन करके जनगणना अधिकारियों की पहचान की पुष्टि की जा सकती है।’

अधिकारियों के मुताबिक, मकानों की सूची तैयार करने का काम 16 मई से शुरू हो चुका है और यह दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के सभी 250 वार्ड में जारी है। इसके तहत मकानों को चिन्हित करने, उनकी स्थिति और संपत्तियों का ब्योरा जुटाने के लिए प्रगणक बृहस्पतिवार तक कम से कम 25,000 ब्लॉक तक पहुंच चुके हैं। राष्ट्रीय राजधानी में इस काम के लिए 50,000 से अधिक प्रगणक लगाए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि जनगणना के रिकॉर्ड पूरी तरह गोपनीय होते हैं और ‘जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 15’ के तहत इन्हें सुरक्षा मिली हुई है। ये रिकॉर्ड आम जनता के देखने के लिए नहीं होते और न ही इस अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े मामलों के अलावा किसी अन्य दीवानी या आपराधिक मुकदमे में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

भाषा सुमित नरेश

नरेश


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