नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) सेवारत अर्धसैनिक कर्मियों और पूर्व सैनिकों के परिवारों ने हाल ही में पारित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) विधेयक के खिलाफ बृहस्पतिवार को दिल्ली के राजघाट पर विरोध प्रदर्शन किया और इसे वापस लेने समेत कुछ अन्य मांगें भी कीं।
प्रदर्शन करने वाले इस समूह में अधिकतर महिलाएं शामिल थीं, जिन्होंने सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 को वापस लिए जाने और इन बलों के कैडर अधिकारियों तथा जवानों को समय पर पदोन्नत किए जाने की मांग की।
सीएपीएफ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) शामिल हैं। इन सभी कर्मियों की मिलाकर संख्या लगभग 10 लाख है।
‘अलायंस ऑफ ऑल एक्स-पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन’ (एएपीडब्ल्यूए) के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, ‘‘राजघाट पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया जिसका उद्देश्य संसद द्वारा पारित सीएपीएफ विधेयक को वापस लेने और उन कैडर अधिकारियों तथा जवानों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की मांग करना था, जो 15 से 17 वर्षों से पदोन्नति न मिलने के कारण गतिरोध में फंसे हुए हैं।’’
उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारियों ने बार-बार इन चिंताओं को उठाया है और अपनी शिकायतों को समझाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की मांग की है, लेकिन अब तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है।
सिंह ने कहा, ‘‘हम यह भी मांग करते हैं कि सीएपीएफ अधिकारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ दिया जाए और उन्हें सही मायने में संगठित समूह ए सेवा (ओजीएएस) के लाभ प्रदान किए जाएं।’’
एएपीडब्ल्यूए के अध्यक्ष एवं सीआरपीएफ कैडर के अतिरिक्त महानिदेशक रैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी एच. आर. सिंह ने कहा कि सरकार ने सीएपीएफ विधेयक पारित किया है, जबकि मई 2025 में उच्चतम न्यायालय ने एक फैसले में सीएपीएफ कैडर के अधिकारियों के लिए बेहतर सेवा संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘इन बलों के लगभग 10 लाख जवान और 13,000 अधिकारी अपने भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हैं। हम अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।’’
भाषा यासिर मनीषा
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