पश्चिम-एशिया संघर्ष, अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन करेगा किसान मोर्चा और श्रमिक संघ
पश्चिम-एशिया संघर्ष, अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन करेगा किसान मोर्चा और श्रमिक संघ
नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) केंद्रीय श्रमिक संगठनों और स्वतंत्र क्षेत्रीय संघों/संगठनों के संयुक्त मंच संयुक्त किसान मोर्चा ने अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के विरोध में 10 मार्च को राष्ट्रव्यापी ‘विरोध दिवस’ मनाने का आह्वान किया है।
संगठनों ने शनिवार को जारी अलग-अलग बयानों में हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का भी कड़ा विरोध जताया।
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि 10 मार्च को पंजाब के बरनाला में किसानों की एक विशाल रैली निकाली जाएगी।
मोर्चा ने कहा कि किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और महिला संगठनों सहित विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को शामिल करते हुए देश भर में संयुक्त विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई गई है।
यूनियन ने जनता से इस दिन को ‘विश्व शांति के लिए साम्राज्यवाद-विरोधी युद्ध दिवस’ के रूप में मनाने का आग्रह किया है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने अमेरिका व इजराइल द्वारा ईरान से छेड़े गए युद्ध की कड़ी निंदा की।
इस युद्ध ने पूरे पश्चिम एशिया और पूरी दुनिया को आर्थिक उथल-पुथल में धकेल दिया है।
किसानों के संगठन ने बयान में कहा, “मोर्चा संप्रभु देश ईरान के प्रमुख अयातुल्ला खामेनेई, कई वरिष्ठ नेताओं और 183 छात्राओं सहित हजारों निर्दोष लोगों की लक्षित हत्या, विद्यालयों और अस्पतालों पर बमबारी व हिंद महासागर में ईरानी जहाज आईरिस देना पर हमले की भी निंदा की।”
हमले में 85 सैनिक मारे गए।
मोर्चा ने बयान में कहा कि युद्ध से विश्व अर्थव्यवस्था और भारत के लोगों पर ‘नई विपत्तियां’ आएंगी।
बयान के मुताबिक, “90 लाख से अधिक भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में भारत की तुलना में बेहतर वेतन वाली नौकरियां कर रहे हैं। उनकी सुरक्षा खतरे में है। ”
मोर्चा ने कहा, “खाड़ी देश भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि हमारे कच्चे तेल आयात का 55 फीसदी हिस्सा उनके क्षेत्र से आता है। खाड़ी देश भारत से 60 लाख टन से अधिक बासमती चावल के साथ-साथ समुद्री उत्पादों, चीनी और ताजी सब्जियों व फलों की बड़ी खेप भी आयात करते हैं। ये निर्यात भारत में लाखों किसानों, श्रमिकों और लघु एवं मध्यम उद्यमों को आजीविका प्रदान करते हैं।”
मोर्चा ने प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल यात्रा की आलोचना करते हुए उन पर ‘75,000 फलस्तीनियों के नरसंहार की अनदेखी’ करने और ‘ईरानी नेतृत्व के प्रमुख की हत्या की तत्काल व स्पष्ट निंदा न करने’ का आरोप लगाया।
यूनियन ने केंद्र सरकार से भारत के साम्राज्यवाद-विरोधी रुख का सख्ती से पालन करने और ईरान के खिलाफ युद्ध को तत्काल समाप्त करने व शांति के लिए विश्व के देशों को एकजुट करने का आग्रह किया।
भाषा जितेंद्र माधव
माधव

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