नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में पिता की उम्रकैद बरकरार

नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में पिता की उम्रकैद बरकरार

नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में पिता की उम्रकैद बरकरार
Modified Date: January 22, 2026 / 02:57 pm IST
Published Date: January 22, 2026 2:57 pm IST

नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपनी नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने और उसे गर्भवती करने के जुर्म में उसके पिता को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।

अदालत ने कहा कि पिता का कर्तव्य अपने बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, उसे किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जा सकती।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने निचली अदालत द्वारा दी गई सजा के खिलाफ पिता की अपील पर उसे कोई राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने यह फैसला इस तथ्य के बावजूद लिया कि सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी मां अपने बयानों से मुकर गई थीं।

पीठ ने भ्रूण के डीएनए परीक्षण के परिणाम को ध्यान में रखते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि अपीलकर्ता ने अपनी ही बेटी के साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए थे, जो उनके रिश्ते को देखते हुए एक ‘जघन्य अपराध’ था।

घटना के समय लड़की 14 वर्ष की थी।

पीठ ने 15 जनवरी को सुनाए गए अपने फैसले में कहा ‘‘परिवार की सामाजिक परिस्थितियां और आर्थिक स्थिति अभियोक्ता और उसकी मां को विरोधाभासी बयान देने या मुकर जाने के लिए विवश कर सकती हैं। हालांकि, ऐसे मामलों में अदालत रिकॉर्ड पर आए वैज्ञानिक साक्ष्यों को पूरी तरह से अनदेखा नहीं कर सकती।’’

अदालत ने कहा, ‘‘ एक पिता, जिस पर अपनी बेटी की सुरक्षा और हिफ़ाज़त का दायित्व होता है, उसे ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती। इस न्यायालय की राय में, सजा को निलंबित करने की याचिका पूरी तरह निराधार है। वास्तव में, अपील ही निराधार है…।’’

प्राथमिकी 2021 में दर्ज की गई थी जब पीड़िता अपनी मां के साथ पुलिस थाने गई और बताया कि जब वह सो रही थी तब उसके पिता ने उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए थे। शिकायत के वक्त लड़की तीन महीने की गर्भवती थी।

इसके बाद गर्भावस्था को समाप्त कर दिया गया और भ्रूण के नमूनों को परीक्षण के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में भेजा गया।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में