एफसीआरए संशोधन विधेयक: लाइसेंस गंवाने वाले एनजीओ की संपत्तियों के प्रबंधन के लिए बनेगा प्राधिकरण

एफसीआरए संशोधन विधेयक: लाइसेंस गंवाने वाले एनजीओ की संपत्तियों के प्रबंधन के लिए बनेगा प्राधिकरण

एफसीआरए संशोधन विधेयक: लाइसेंस गंवाने वाले एनजीओ की संपत्तियों के प्रबंधन के लिए बनेगा प्राधिकरण
Modified Date: March 25, 2026 / 04:29 pm IST
Published Date: March 25, 2026 4:29 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) सरकार ने बुधवार को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन के लिए लोकसभा में जो विधेयक पेश किया उसमें विदेशी वित्त पोषित संगठनों पर निगरानी के साथ यह प्रस्ताव किया गया है कि लाइसेंस गंवाने वाली गैर-लाभकारी संस्थाओं की संपत्तियों को जब्त करने और इनका प्रबंधन करने के लिए एक नया प्राधिकरण बनाया जाएगा।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ विधेयक पेश किया।

इसमें विदेशी अंशदान और संपत्तियों के पर्यवेक्षण, प्रबंधन और निपटान के लिए एक व्यापक वैधानिक ढांचे का प्रावधान भी किया गया है।

आधिकारिक बयान में कहा गया है कि वर्तमान में लगभग 16,000 संगठन अधिनियम के तहत पंजीकृत हैं और उन्हें सालाना लगभग 22,000 करोड़ रुपये मिलते हैं।

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के कथन के अनुसार, प्रस्तावित कानून पूर्व अनुमति के तहत प्राप्ति और उपयोग के लिए समयसीमा प्रदान करने का प्रावधान करता है। यह प्रमाणपत्र की समाप्ति, निलंबन के दौरान संपत्ति के प्रबंधन को विनियमित करने, दंड को तर्कसंगत बनाने और जांच शुरू करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता का प्रावधान भी करता है।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक को लेकर विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक का उद्देश्य वैध गतिविधियों को बाधित करना नहीं, बल्कि विदेश अंशदान की प्रक्रिया को जवाबदेही और पारदर्शी बनाना है।

उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता और देशहित में काम करने वाले संस्थानों के कार्यों में कोई अवरोध पैदा नहीं होगा, लेकिन इसके विपरीत काम करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में धारा 15 संपत्तियों को निहित करने का प्रावधान करती है, लेकिन ऐसी संपत्तियों के पर्यवेक्षण, प्रबंधन और निपटान के लिए एक व्यापक ढांचे की अनुपस्थिति के कारण प्रशासनिक अनिश्चितता और दुरुपयोग की गुंजाइश पैदा हो गई है।

प्रस्तावित कानून के तहत, सरकार ने उन मामलों में विदेशी योगदान से बनाई गई संपत्तियों का अस्थायी या स्थायी नियंत्रण लेने के लिए ‘‘नामित प्राधिकरण’’ स्थापित करने के लिए एक नया अध्याय 3ए पेश किया है, जहां विदेशी अंशदान प्रमाण पत्र रद्द कर दिए गए हैं, जिनका आत्मसमर्पण कर दिया गया है या बंद कर दिए गए हैं।

यह एक ‘नामित प्राधिकार’ में विदेशी अंशदान और परिसंपत्तियों को निहित करने, पर्यवेक्षण, प्रबंधन और निपटान के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है।

एक मई, 2011 को अधिनियमित विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010, विदेशी अंशदान और विदेशी आतिथ्य की स्वीकृति और उपयोग को नियंत्रित करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तरह के धन के प्रवाह से राष्ट्रीय हित, सार्वजनिक व्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। अधिनियम में इससे पहले 2016, 2018 और 2020 में संशोधन किया गया है।

भाषा हक हक वैभव

वैभव


लेखक के बारे में