ओडिशा में बाढ़ की स्थिति गंभीर, महानदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका

ओडिशा में बाढ़ की स्थिति गंभीर, महानदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका

ओडिशा में बाढ़ की स्थिति गंभीर, महानदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका
Modified Date: July 30, 2026 / 01:12 pm IST
Published Date: July 30, 2026 1:12 pm IST

भुवनेश्वर, 30 जुलाई (भाषा) ओडिशा में बृहस्पतिवार को भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी रही, खास तौर पर राज्य के चार उत्तरी जिलों में हालात चिंताजनक हैं, जबकि महानदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका पैदा हो गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि उत्तर ओडिशा की कुछ नदियों का जलस्तर घटना शुरू हुआ है, लेकिन वे अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। उन्होंने बताया कि लगातार बारिश के कारण रातभर में कई और इलाके जलमग्न हो गए।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और बाढ़ प्रभावित जिलों के सभी अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।’’

गहरा निम्न वायु दाब क्षेत्र बनने के प्रभाव से लगातार हुई बारिश के कारण बालासोर, भद्रक, जाजपुर और मयूरभंज जिलों के कई गांव जलमग्न हो गए हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वर्षा पूर्वानुमान, और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने भद्रक, जाजपुर, नबरंगपुर और कालाहांडी जिलों में स्कूलों तथा आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद रखने के आदेश दिए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि बचाव अभियान तेज कर दिया गया है और अब तक 1.65 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बाढ़ से अब तक छह लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

जाजपुर के जिलाधिकारी अंबर कुमार कर ने बताया कि बुधवार रात दशरथपुर प्रखंड के अंतर्गत पाटना के पास बैतरणी नदी की सहायक कानी नदी के तटबंध में दो स्थानों पर दरार आने से बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई।

अधिकारियों के अनुसार, तटबंध टूटने से कई गांव चारों ओर से पानी से घिर गए और नए क्षेत्रों में भी पानी भर गया, जिससे तीन प्रखंडों के लोगों पर गंभीर असर पड़ा है।

इस बीच, महानदी का बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा के बाद, नदी के किनारे स्थित जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि तेल, इब और जीरा नदियों का बाढ़ का पानी भी महानदी में मिल रहा है, जिससे नदी का जलस्तर और तेजी से बढ़ रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, हीराकुंड बांध में जलस्तर 620 फुट दर्ज किया गया, जबकि इसकी पूर्ण जलाशय क्षमता 630 फुट है।

बांध में 3,31,063 क्यूसेक (घन फुट प्रति सेकंड) पानी की आवक हो रही है, जबकि दो फाटकों के माध्यम से 64,109 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो बांध के अतिरिक्त फाटक भी खोलने पड़ सकते हैं।

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता दिलीप कुमार राउत ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह छह बजे कटक के निकट मुंडली में लगभग आठ लाख क्यूसेक पानी बह रहा था, जो शाम तक बढ़कर नौ लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है। इससे महानदी तंत्र में मध्यम स्तर की बाढ़ आने की आशंका है।

दिल्ली दौरे पर गए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को उच्च सतर्कता बरतने और प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं सभी लोगों से अपील करता हूं कि बाढ़ की स्थिति को लेकर घबराएं नहीं। नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।’’

भुवनेश्वर मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने कहा कि बृहस्पतिवार को राज्य में वर्षा में कमी आने की संभावना है, हालांकि कई जिलों में गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

भाषा मनीषा सुभाष

सुभाष


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