होटल और अन्य जगहों पर जलावन के इस्तेमाल से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने का अनुमान
होटल और अन्य जगहों पर जलावन के इस्तेमाल से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने का अनुमान
चेन्नई, 21 मार्च (भाषा) रसोई गैस (एलपीजी) संकट के कारण तमिलनाडु के होटल उद्योग के जलावन पर निर्भर होने से जल्द ही खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, लेकिन लेकिन त्योहारों के मौसम में जो उत्साह कम कर रहा है, वह है बिरयानी का महंगा हो जाना।
मुस्लिम धर्मावलंबी इस बात से दुखी हैं कि पश्चिम एशिया के सशस्त्र संघर्ष से उत्पन्न एलपीजी संकट के कारण रमजान के सीजन में पारिवारिक समारोहों में लोगों की संख्या कम हो गई है।
तमिलनाडु होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष एम वेंकडासुब्बू ने कहा कि इस बार होटल मालिकों ने बिरयानी के साथ परोसी जाने वाली चीजें भी जलावन पर ही तैयार करना पसंद किया।
उन्होंने कहा, ‘‘लोग अलग से जो भी व्यंजन मंगाएंगे, वह उपलब्ध होगा क्योंकि इस बार होटलों ने जलावन का इस्तेमाल करके बिरयानी के साथ साथ उन व्यंजनों को भी बनाना शुरू कर दिया है। लेकिन लकड़ी की कीमत बढ़ने से लागत भी बढ़ गई है। वैसे होटलों ने तले हुए व्यंजनों को बेचना बंद कर दिया है।’’
उद्योग जगत के जानकारों के अनुसार, अचानक उत्पन्न हुए व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर संकट के कारण 90 प्रतिशत होटल लाभ नहीं कमा पा रहे हैं और खासकर अकेले चेन्नई में होटलों के कारोबार में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है।
शनिवार को रमजान का त्योहार मनाया जा रहा है, ऐसे में होटलों ने बताया कि बिरयानी की कीमतें बढ़ गई हैं (ईद के दौरान सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला व्यंजन) क्योंकि इसे जलावन पर पकाया जा रहा है।
एक सूत्र ने बताया, ‘‘दूसरा, जलावन पर बिरयानी पकाना पारंपरिक तरीका है, क्योंकि एलपीजी की तुलना में लकड़ी पर बिरयानी बनाने पर स्वाद बेहतर होता है। लेकिन एलपीजी स्टोव के आने के बाद से बहुत लोग लकड़ी का कम इस्तेमाल करके बिरयानी बनाते थे। यह (जलावन का इस्तेमाल) सिर्फ शादियों या सामूहिक आयोजनों में ही किया जाता था। अब होटल जलावन का इस्तेमाल करने लगे हैं। चूंकि जलावन की कीमत कई गुना बढ़ गयी है, फलस्वरूप बिरयानी की कीमत भी बढ़ गई है।’’
उन्होंने कहा कि इस बार कुछ होटल मालिक केंद्रीकृत रसोई (एक ही बड़ी रसोई) में बिरयानी तैयार करना पसंद कर रहे हैं क्योंकि इससे समय, लागत और लकड़ी की बचत होती है।
उन्होंने कहा,‘‘केंद्रीकृत रसोई से बिरयानी को वितरण के लिए अन्य शाखाओं में ले जाया जाता है।’’
इसी बीच पेरुंगुडी में लंबे समय से रह रहे हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि पहले रमजान के दौरान कम से कम सात से दस लोगों के परिवार के रिश्तेदार और सदस्य एक जगह इकट्ठा होते थे और एक साथ भोजन करके रमजान मनाते थे।
उन्होंने कहा,‘‘इस बार रिश्तेदारों और अन्य लोगों के घर जाने के बजाय दो या तीन सदस्यों वाले परिवार ने एलपीजी की कमी और कीमतों में भारी वृद्धि को देखते हुए अपने-अपने घरों में कम मात्रा में बिरयानी तैयार की।’’
इसी बीच, वेंकडासुब्बू ने कुछ आंकड़े देते हुए कहा कि व्यावसायिक एलपीजी की कमी के कारण चेन्नई में लगभग 30 प्रतिशत कारोबार में गिरावट आई, जबकि तमिलनाडु के अन्य हिस्सों में 10 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हुआ।
भाषा
शुभम राजकुमार
राजकुमार

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