वन संरक्षण का अर्थ केवल वृक्षारोपण नहीं बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण : भूपेंद्र यादव

वन संरक्षण का अर्थ केवल वृक्षारोपण नहीं बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण : भूपेंद्र यादव

वन संरक्षण का अर्थ केवल वृक्षारोपण नहीं बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण : भूपेंद्र यादव
Modified Date: March 21, 2026 / 09:58 pm IST
Published Date: March 21, 2026 9:58 pm IST

नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को कहा कि वन संरक्षण केवल वृक्षारोपण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण शामिल है।

यादव ने देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान में अंतरराष्ट्रीय वन दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में ये टिप्पणियां कीं।

उन्होंने कहा, ‘‘ वन संरक्षण में केवल वृक्षारोपण ही नहीं, बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण भी शामिल है। प्रकृति सर्वोपरि है और मानव अस्तित्व के लिए इसके साथ सहअस्तित्व अनिवार्य है।’’

पर्यावरण मंत्री ने एक समग्र वन प्रबंधन दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए अंतर-विभागीय समन्वय बढ़ाने का आह्वान किया और वन संसाधनों को बनाए रखने में सांस्कृतिक मूल्यों, ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी) और कॉर्बन क्रेडिट के महत्व पर प्रकाश डाला।

इस कार्यशाला में वन-आधारित जैव-उत्पादों और उनके व्यावसायीकरण, सतत वन प्रबंधन, नीतिगत ढांचे, उद्यमिता और जैव-अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में नवाचार की भूमिका सहित प्रमुख विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘यह कार्यक्रम मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने, स्थानीय आजीविका को समर्थन देने और प्राकृतिक वनों पर दबाव कम करने के लिए वन संसाधनों के सतत उपयोग पर प्रकाश डालता है। तकनीकी सत्रों में कृषि वानिकी, गैर-लकड़ी वन उत्पाद, इंजीनियर लकड़ी उत्पाद, वन उद्योग, कार्बन बाजार, वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण पर्यटन और डिजिटल निगरानी जैसे विषय शामिल हैं।’’

बयान के मुताबिक इस कार्यशाला में देश भर के वैज्ञानिक, नीति निर्माता, उद्योग जगत के हितधारक और वन प्रबंधक भारत की वन-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ आए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य प्रमुख चुनौतियों की पहचान करना, अवसरों का पता लगाना और इस क्षेत्र में नीतिगत और रणनीतिक हस्तक्षेपों को सूचित करना है।

भाषा रवि कांत रवि कांत माधव

माधव


लेखक के बारे में