कोझिकोड (केरल), तीन मार्च (भाषा) भारतीय राजनीति में 1980 और 1990 के दशक के दौरान प्रमुख चेहरों में शामिल रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री के.पी. उन्नीकृष्णन का मंगलवार तड़के कोझिकोड में निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे। उनके परिवार ने यह जानकारी दी।
उन्नीकृष्णन के परिजन के अनुसार, वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों के इलाज के दौरान एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। बुधवार को यहां मनारी श्मशान में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
परिजनों ने बताया कि इससे पहले उनका पार्थिव शरीर पन्नियंकारा में स्थित उन्नीकृष्णन के घर लाए जाने के बाद विभिन्न क्षेत्रों से लोग वहां पहुंचे।
वडकरा से लगातार छह बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए उन्नीकृष्णन ने 1989-90 में वी पी सिंह सरकार के मंत्रिमंडल में केंद्रीय भूतल परिवहन एवं संचार मंत्री के रूप में प्रभार संभाला था।
मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने खाड़ी युद्ध के समय भारतीयों की निकासी की निगरानी की।
पत्रकार के रूप में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत करने वाले उन्नीकृष्णन 1971 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में वडकरा से पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने 1977, 1980, 1984, 1989 और 1991 में भी इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
वह 1981 से 1984 के बीच संसद में कांग्रेस (सेक्युलर) के नेता 1980 से 1982 तक लोक लेखा समिति के सदस्य रहे।
उन्नीकृष्णन एक समय इंदिरा गांधी के विश्वासपात्र माने जाते थे। हालांकि, बाद में राजनीतिक मतभेदों के कारण उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी।
इसके बाद वह कांग्रेस (यू) और कांग्रेस (एस) में सक्रिय रहे। लेकिन 1995 में फिर से कांग्रेस से जुड़ गए।
बीस सितंबर, 1936 को जन्मे उन्नीकृष्णन ने चेन्नई के मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की और वहीं से कानून की डिग्री हासिल की। इस दौरान वह सोशलिस्ट पार्टी और बाद में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े रहे।
उन्होंने 1960 के दशक में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी और 1962 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य बने।
उन्नीकृष्णन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस में नेहरूवादी मूल्यों को बनाए रखने का प्रयास किया था।
उन्होंने कहा कि केरलवासी उन्नीकृष्णन ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
मुख्यमंत्री ने ‘लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष राजनीति के मजबूत राष्ट्रीय पैरोकार’ को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि “महत्वपूर्ण क्षणों में, देश ने उनके दृष्टिकोणों को जाना।”
नेता प्रतिपक्ष वी.डी. सतीसन ने अपने शोक संदेश में कहा कि उन्नीकृष्णन कांग्रेस के समाजवादी सोच वाले नेता थे, जिन्होंने जवाहरलाल नेहरू का विरोध करने पर समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया का विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेता होने के अलावा उन्नीकृष्णन एक लेखक, वक्ता और पत्रकार भी थे।
उन्होंने कहा, “वह एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने पढ़ाई के माध्यम से गहरी विद्वता प्राप्त की। उन्नीकृष्णन का निधन भारतीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”
भाषा जोहेब रंजन
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