नंदन नीलेकणि से एस सोमनाथ तक: केंद्र के परीक्षा सुधार कार्यबल के विशेषज्ञों का परिचय

नंदन नीलेकणि से एस सोमनाथ तक: केंद्र के परीक्षा सुधार कार्यबल के विशेषज्ञों का परिचय

नंदन नीलेकणि से एस सोमनाथ तक: केंद्र के परीक्षा सुधार कार्यबल के विशेषज्ञों का परिचय
Modified Date: July 27, 2026 / 05:30 pm IST
Published Date: July 27, 2026 5:30 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करने के वास्ते इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल के गठन की घोषणा की है।

कार्यबल के छह सदस्यों का ब्यौरा इस प्रकार है:

1. नंदन नीलेकणि

इंफोसिस के सह-संस्थापक एवं चेयरमैन नीलेकणि को भारत के ‘आधार’ डिजिटल पहचान कार्यक्रम- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। उन्होंने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंतर-संचालनीय भुगतान प्रणाली के माध्यम से भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को आकार देने में योगदान दिया।

वर्ष 1981 में नीलेकणि ने पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स की नौकरी छोड़ने के बाद एन आर नारायण मूर्ति और पांच अन्य लोगों के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की।

कार्यबल में भूमिका: परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल संबंधी कार्यबल की सिफारिशों का नेतृत्व करना।

2. एस. सोमनाथ

प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक सोमनाथ ने बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में आईआईटी मद्रास से पीएचडी की। उन्होंने वर्ष 2022 से 2025 तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव के रूप में सेवाएं दीं।

कार्यबल में भूमिका: परीक्षा प्रणाली से जुड़े पैनल में बड़े पैमाने की प्रौद्योगिकी प्रणालियों से संबंधित विशेषज्ञता उपलब्ध कराना।

3. तपन डेका

हिमाचल प्रदेश कैडर के 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी डेका ने जून 2022 से जून 2026 तक खुफिया ब्यूरो (आईबी) के निदेशक के रूप में कार्य किया। अनुभवी खुफिया अधिकारी डेका ने आतंकवाद रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनमें 26/11 मुंबई हमले, इंडियन मुजाहिदीन के खिलाफ कार्रवाई और जम्मू-कश्मीर एवं पूर्वोत्तर में सुरक्षा अभियान शामिल हैं।

कार्यबल में भूमिका: सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा से लेकर अभ्यर्थियों के सत्यापन एवं परिणाम प्रक्रिया तक परीक्षा के हर चरण को सुरक्षित बनाने वाले डिजिटल समाधानों की समीक्षा में मदद करना।

4. अनीता करवल

वर्ष 1988 बैच की आईएएस अधिकारी करवल के पास लोक प्रशासन, विशेषकर स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में 36 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने 2017 से 2021 तक केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और बाद में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की सचिव रहीं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सीबीएसई अध्यक्ष रहते हुए 2018 में बोर्ड परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले के बाद उन्हें छात्रों के विरोध प्रदर्शन का सामना भी करना पड़ा था।

कार्यबल में भूमिका: शिक्षा नीति संबंधी विशेषज्ञता उपलब्ध कराना।

5. वी कामकोटि

कामकोटि वर्ष 2022 से आईआईटी मद्रास के निदेशक हैं और भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ विकसित करने वाली शोध टीम का नेतृत्व करने के लिए जाने जाते हैं।

आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र कामकोटि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा गठित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कार्यबल के अध्यक्ष भी हैं। वह स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकास से जुड़े कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों का नेतृत्व कर रहे हैं।

कार्यबल में भूमिका: शैक्षणिक और तकनीकी सुझाव उपलब्ध कराना।

6. अमृत लाल मीणा

बिहार कैडर के 1989 बैच के आईएएस अधिकारी मीणा के पास 36 वर्षों से अधिक का प्रशासनिक अनुभव है, जिसमें बिहार सरकार के साथ 25 वर्ष और केंद्र सरकार के साथ 11 वर्ष शामिल है। वह इससे पहले बिहार के मुख्य सचिव और कोयला मंत्रालय के सचिव रह चुके हैं। उन्होंने उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) में विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स) का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला था।

कार्यबल में भूमिका: लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ के रूप में योगदान देना।

भाषा

अमित नरेश

नरेश


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