एनएसएस बोर्ड में गणेश कुमार का कार्यकाल खत्म, संगठन ने उन्हें पुनः नियुक्त नहीं करने का फैसला किया

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एनएसएस बोर्ड में गणेश कुमार का कार्यकाल खत्म, संगठन ने उन्हें पुनः नियुक्त नहीं करने का फैसला किया

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  • Publish Date - June 20, 2026 / 04:27 PM IST,
    Updated On - June 20, 2026 / 04:27 PM IST

कोट्टयम (केरल), 20 जून (भाषा) पूर्व मंत्री और अभिनेता के. बी. गणेश कुमार अब एनएसएस के निदेशक मंडल में नहीं रहेंगे। संगठन ने उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें दोबारा नियुक्त नहीं करने का फैसला किया है। एक पदाधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस) केरल के प्रभावशाली नायर समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाला एक प्रमुख संगठन है। उसने 2023 में केरल कांग्रेस (बी) के अध्यक्ष कुमार को अपने निदेशक मंडल में शामिल किया था।

वह पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार में परिवहन मंत्री थे। वह हाल के विधानसभा चुनाव में कोल्लम ज़िले के पथानापुरम सीट से हार गये।

एनएसएस महासचिव जी सुकुमारन नायर ने यहां पत्रकारों को बताया कि कुमार का कार्यकाल खत्म हो गया है और उन्हें अगले कार्यकाल के लिए नहीं चुना गया।

नायर ने कहा, ‘‘उन्हें बोर्ड से हटाया नहीं गया है। उनका कार्यकाल खत्म हो गया और उन्हें दोबारा नहीं चुना गया।’’

उन्होंने इस आरोप को खारिज कर दिया कि यह फ़ैसला अलोकतांत्रिक है।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे सदस्य हैं जो सालों से बोर्ड का हिस्सा बनने का इंतजार कर रहे हैं। नियुक्तियां और हटाने की प्रक्रिया एनएसएस तालुक स्तर पर किए गए काम के आधार पर होती है।’’

नायर ने कहा कि अगर कुमार को लगता है कि कोई गड़बड़ी हुई है, तो वह अदालत जा सकते हैं।

उन्होंने पूछा, ‘‘अगर कुछ भी गड़बड़ थी, तो वह मामला दर्ज करा सकते थे। उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया? क्या कोई कह सकता है कि एनएसएस में लोकतंत्र नहीं है?’’

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कुमार की अध्यक्षता वाली एनएसएस पथानापुरम तालुक यूनियन समिति को ज्यादातर सदस्यों के इस्तीफ़े के बाद भंग कर दिया गया।

कुमार का आरोप था कि उन्हें समिति के 18 में से 12 सदस्यों का समर्थन हासिल था, फिर भी समिति को भंग करके उसकी जगह एक तदर्थ समिति बना दी गई।

बोर्ड सदस्य के तौर पर दोबारा नियुक्त न किए जाने के फ़ैसले पर कुमार ने कहा कि उन्हें पद की कोई चिंता नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने बोर्ड में बने रहने के लिए कोई अनुरोध नहीं किया था। इससे पहले, मुझे बिना किसी कोशिश के ही चुना गया था। महासचिव को ऐसे फ़ैसले लेने की आज़ादी है। मैं एनएसएस में किसी पद के लिए नहीं आया था। मैं महासचिव का समर्थन करना जारी रखूंगा।’’

भाषा राजकुमार पवनेश

पवनेश