हरिद्वार में गंगा चेतावनी स्तर के करीब पहुंची, बाढ़ चौकियां अलर्ट पर

हरिद्वार में गंगा चेतावनी स्तर के करीब पहुंची, बाढ़ चौकियां अलर्ट पर

हरिद्वार में गंगा चेतावनी स्तर के करीब पहुंची, बाढ़ चौकियां अलर्ट पर
Modified Date: July 30, 2026 / 01:26 pm IST
Published Date: July 30, 2026 1:26 pm IST

हरिद्वार, 30 जुलाई (भाषा) उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के साथ ही मैदान में भी लगातार हो रही भारी वर्षा से हरिद्वार में गंगा नदी पूरे उफान पर है और चेतावनी स्तर के करीब बह रही है जिससे तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों के मुताबिक, पर्वतीय इलाकों में लगातार वर्षा से गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है तथा खतरे का निशान जल्द ही पार होने की संभावना है । इसे देखते हुए मैदानी क्षेत्रों में लोगों की चिंता बढ़ गयी है ।

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और हरिद्वार जिला प्रशासन गंगा के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं और गंगा किनारे बनाई गईं बाढ़ चौकियों को भी अलर्ट कर दिया गया है ।

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग हेडवर्क्स के सब डिवीजनल अधिकारी (एसडीओ) भारत भूषण ने बताया कि हरिद्वार में दोपहर को गंगा जलस्तर 292.55 मीटर मापा गया जो उसके 293 मीटर के चेतावनी स्तर से केवल 45 सेंटीमीटर नीचे है। हरिद्वार में गंगा का खतरे का निशान 294 मीटर पर है ।

उन्होंने बताया कि गंगा में इस वक्त एक लाख 44 हजार क्यूसेक जल बह रहा है।

अधिकारियों का मानना है कि अगर पहाड़ी इलाकों में इसी तरह वर्षा जारी रही तो गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है जिससे हरिद्वार के निचले इलाकों व उत्तर प्रदेश के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। इसे देखते हुए गंगा किनारे बनायी गयी बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है।

हरिद्वार में बृहस्पतिवार सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण शहर में जगह—जगह जलभराव के हालात पैदा हो गए है और आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शहर के मुख्य इलाकों, कॉलोनियों और बाजारों में पानी इकटठा होने से लोगों की मुसीबतें बढ़ गयी हैं ।

हरिद्वार में सबसे ज्यादा बुरे हालात यहां के सबसे व्यस्त और प्रमुख इलाके रानीपुर मोड़ के हैं जहां भारी बारिश से पूरा इलाका दरिया में तब्दील हो गया। है। इस इलाके में कंपनियों के बड़े-बड़े शोरूम और कार्यालय भी हैं। इसके अलावा, कनखल, ज्वालापुर, भीमगोड़ा नई बस्ती आदि में भी जगह-जगह जल भराव देखा गया।

भाषा सं दीप्ति सिम्मी माधव

माधव


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